एक फोटोग्राफर से बात चीत

कोरे अजनबियों से बात करने की आदत है , हॉस्टल के दिनों में अर्पिता समझाती थी और आफिस में दीपिका। पर मुझपर कोई असर नहीं पड़ता। मुझे डर भी नहीं लगता। लगता है ईश्वर अच्छे ही लोगों से मिलाएंगे , और इत्तिफाकन सभी स्त्री, पुरुष मित्र जो बने आज तक बेहतरीन लोग मिले।

ज़िन्दगी को यूँ कित कित के खेल की तरह जीने का एक कारण अलग तरह की परवरिश भी है। एक तरह की यायावरी है जो मुझ जैसे क़ई लोगों के पास है जिनको अपने आस-पास बड़ा उकड़ू लगता है और दूर कहीं गुम रहने की चाहत में आज़ादी मिलती है।

जैसी भी मिली ज़िंदगी बस एक गिफ्ट है, जिसने हमेशा अधूरी बातों पर लाकर छोड़ दिया, सुडोकु जैसी। इसलिए इसके पन्नो की तमाम अधूरी बातें खूबसूरत मोड़ तक ला कर छोड़ती आयी हूँ। एक पन्न छोड़ कर। वो आँधी में फटा था। उँगलियाँ इतनी मज़बूत भी नहीं कि चीथड़े समेट पाऊं, होगा कभी ये भी होगा। सारे आरोपों के बीच एक मुक्कमल ज़िन्दगी की तलाश बनी रहती है।

यात्रा में यूँ ही मिले अजनबियों से कभी-कभी मज़ेदार लहज़े में बातें सुनने को मिलती है। ऐसे जैसे उनका जीवन कोई उपन्यास हो और बात-चीत उस उपन्यास के डायलॉग्स। जैसे कि वो हाड़ मांस के लोग वास्तविक थे ही नहीं बस एक हवा थी नज़र घुमाया और आदमी गायब, न जाने बात हुई भी थी या कि ख़्याल ही था ।

दुनिया का हर आदमी एक किताब है, सबकी अपनी बुराईयों, अधमरी इच्छाओं और कुर्बानियों का पिटारा है, कुछ लोगों की भटकन रोज़ नए पंडोरा बक्से तलाशती है।

ऐसी ही बातों का एक रिकॉर्ड मोबाइल नोट्स में पड़ा है उसे दुनिया के हवाले कर देती हूँ। इन बातों में एक भी शब्द मेरा नहीं केवल एक फोटोग्राफर की सुनी सुनाई है। इसके घटने का भी कोई प्रमाण नहीं है। इसमें रहस्य है । यह रहस्य ही इन बातों को बांधे रखता है।

उसने जैसा कहा था मैनें वैसा नोट किया :

मैंने इसलिए तस्वीरें ली क्योंकि मुझे याद नहीं रहता ।
मैं तस्वीरें देखकर अतीत को देखता हूं। इस दुनिया में, बहुत सी चुनौतियों को देखते हुए कुछ अलग देखना चाहा मैंने।

जब से मोबाईल हर हाथ में आया है तब से हर हाथ को वो तस्वीरें लेते हुए देखा जिसमें सिर्फ़ मोबाईल धारक या उसके साथ रहने वाले कुछ लोग ही दिखने लगे। मुझे लगा खुद की तस्वीरों से हम किसी को सिर्फ इतना दिखा सकते है कि मैं यहाँ हूं।

धीरे धीरे मेरी रूचि इन बातों से बाहर होने लगी।मुझे लगने लगा कि मुझे वो तस्वीरें लेनी चाहिए जो अपने आप में एक कहानी हो। देखने वाला एक बार सोचे कि वाकई इस तस्वीर में कुछ है या नहीं। हजारों लोग देखते है मेरी वाल । कुछ लोगों की एक शिकायत है। उन्हें मेरी तस्वीर मेरी वॉल पर नहीं मिलती है। दूसरी बात मैं जगह बहुत कम टैग करता हूँ। इसका एक कारण सुरक्षा लिहाज है ।

मैं ऐसे लोगों के नजदीक से गुजरा हूँ कि वो मुझे नहीं पहचान पाए लेकिन वॉल पर कुछ देखा तो ठनक गये,बोले हम भी यहीं थे, आपको नहीं देखा , ये सब नॉर्मल है।

मेरी तस्वीर आपको सुकून नहीं देगी लेकिन मेरे द्वारा ली गई तस्वीर जरूर आपको एक बार रोक सकती है। इस दुनिया में हजारों लोग लिखते हैं। सैकड़ों लोग गाते हैं। चंद लोग तस्वीरें उतारते है।

मैं बहुत कुछ देखने के बाद उसे भूलना चाहता हूँ। इसलिए मुझे किसी बात से ये कभी नहीं लगता है कि ये बात इस दुनिया की आखिरी बात है।कुछ सवालों के जवाब मैं नहीं देता हूं। मैं एक रॉ की तरह जीता हूँ।

मुझे दुनियां के दुख दर्द सुनने में दिलचस्पी है।लेकिन दुखों को दूसरों के ऊपर ढोना बेवकूफी लगती है। सबकी ज़िन्दगी में दुख तकलीफें हैं, लेकिन हम जीना नहीं छोड़ सकते। वहीं लोग भटक जाते है।

मैंने आज पूरा दुखड़ा सुना। आखिर में कहा , “इस बात में कुछ भी नया नहीं है”। सुनाने वाले को अचंभा हुआ। क्योंकि मेरे सुर उसके सुर में नहीं मिले। अचंभा तो होना ही था। उसने जितना दुख सुनाया उसके मुकाबले जब सुकून का पूछा तो सामने आया कि मुझे दुख की तलाश नहीं है।

मैंने कहा , “आप मुझसे बेहतर जिंदगी जीते हैं। लेकिन आप जी नहीं पाते। इसलिए मेरी जिंदगी आपको बेहतर लगती है। मतलब हम दोनों बेहतर जी रहे है।”

जीवन क्या है, एक अनुभव। कहीं से भी मिले ले लिया। लेकिन ठहरना बहुत ज़रुरी है ज़िन्दगी में।

नये घर बनते देख रहा हूँ। पूछता हूँ, “आप ये अलग घर क्यों बना रहे हो?” तो जवाब आता है, “कल बेटे की शादी हो जाएगी तो क्या पता हमें न रहने दे इस घर में।” मतलब बेटे की उम्र आज कितनी है, दस साल। घर अभी से अलग!

फिर बेटी भी तो है ना घर में, उसके लिए कुछ सोचा? अब कोई जवाब नहीं। क्यों? वो कहाँ रहेगी?

हम क्यों भागते है? कुछ पता नहीं, भाग रहे हैं, हम बेटे को दिखा रहे हैं, अगले दस साल में तुम ये सुलूक करो हमारे साथ। फिर वो न तो पढता है, न कुछ काम करता है, उसे पहले ही पता है, मेरा घर तो बन गया है।

संसार दुखों से भरा हुआ है। मैं चाय पीकर सब भूल जाता हूँ।कोई दुख नहीं है। ये सब मन से उपजी सोच है।अचानक से जागकर चल देता हूँ।

नींद कुछ भूला दे तो सब कुछ बढिया है।

विराम।

तस्वीर साभार – फोटोग्राफर

4 thoughts on “एक फोटोग्राफर से बात चीत

  1. Really Nice, 👌😍 you writing about The Social message…. Which impact many life that’s Wonderful… 🙏😍
    I hope you continue it in future also… ✌️

    Liked by 1 person

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