कोई किसी से उम्र में छोटा बड़ा नहीं हो सकता। जब सभी यहाँ सालों से आते जाते रहे रहे हैं तो किसी के उम्र का क्या हिसाब?

हम सबको केवल आत्म बोध का छुटपन या बड़प्पन होता है बाकी समझिये हम सभी बड़े पुराने हैं ।

पर एक सच ये भी है कि हम में से कुछ इतने पुराने हैं जिनके सानिध्य में नदी और पहाड़ के पास होने का सा सुख रहता है।

मैंने समय समय पर कुछ बड़े पुराने बच्चों का साथ जिया है और कुछ बुजुर्गों को अभी अभी जन्मा सा पाया है।

इसका एहसास एक बात चीत में भी हो जाता है या महज़ देखते रहने से भी। कोई आदत अनजाने में प्रयोग किये गए शब्द , शारीरिक हरकत, या हस्तलेखन सब नए पुराने होने में सांकेतिक होते हैं, लेकिन मेरा यकीन मानिए आप न तो छोटे हैं न बड़े हैं। केवल यात्री हैं।

ये बातें अजीब सी हैं। पता नहीं अचानक ज़ेहन में क्यों आती हैं। अक्सर कोई कुछ ऐसा पूछ देता है जिसके मेसेज का जवाब देते ऐसे जवाब कौंधते हैं। क्या परस्पर बातचीत में ऐसे वाक्यों की जगह बची है?

हाँ बची है।

प्रज्ञा

मुंबई, 26/09/2020