मिट्टी के दियों से
घर रौशन मेरा भी
उस कुम्हार का भी,
फूलों की झालर से
सज गया दरवाज़ा
मेरा भी
फूलवाली का भी
ठेला गाड़ी से
दो फूलझड़ियाँ ले ली
रख लिया मन
अपनी बिटिया का
जुट गयी दीवाली
गाड़ी वाले की भी
उठा लिए रंग फुटपाथ से
घर की चौखट पर
मैने बनाई रंगोली
किसी ने कोलम औऱ अल्पना
खोंस आयी
बूढ़ी अम्मा के आँचल में
त्योहार की आस
मिट्टी में सन कर बच्चों ने
बनाये घरौंदे बिना दीवारों के
एक दिया राशिद ने रखा
एक रख दिया रचित ने भी
झिलमिलाती रहे दुनिया मेरी
जगमगाता रहे एक एक घर
रुकें आराम करें
खाएं पीएं और
ठहर जाएं खुशियाँ घर में
मेरे भी तेरे भी
शुभ दीपावली।

Pragya Mishra
13/11/2020