नया साल
एक उत्सव है
संवाद है
भविष्य का वर्तमान से
एक आश्वासन कि
बाकी हैं अथाह संभावनाएं
और बाकी हो तुम।

सिकुड़े निराश लिपटे चादर में
लेलो अच्छी नींद
नई शुरआत के लिए
सीधे आसान शब्द
सहेजे जा रहे
प्राण ऊर्जा की तरह
तुम तक संवाद पहुँचे मित्र
वक्री ग्रहों की दुनिया में
कहीं प्रतीक्षारत है प्रेम

प्रतीक्षारत हैं मित्र
जिन्हें थिरकना पसंद है
अनाड़ी से झूमते हाथ पैर
खींच लेंगे तुम्हारे
दुखों का लबादा
आज की रात
तरंग उमंग के सभी पर्यायवाची
भर दिये जायेंगे
वैक्सीन बना कर
नहीं छोड़ना है आज
अकेला किसी दोस्त को।

नया दिन नया साल
आश्वासन है
बाकी हैं अथाह संभावनाएं
और अभी बाकी हो तुम।

1/1/2021
मुंबई
Pragya Mishra