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दुनिया से कदमताल करते हुए हमारा आज का विषय है
कहानी वैक्सीन की – जिसे हम दो भागों में प्रस्तुत करने जा रहे हैं।

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क्या होती है वैक्सीन? क्यो ज़रूरी है टीकाकरण और क्या है vaccination का इतिहास क्या जादू किया है इसने मानव सभ्यता के फलने फूलने पर।

पूरी दुनिया कोविड-19 के संक्रमण से लड़ रही है, हम आए दिन समाचार पत्रों में वैज्ञानिकों के विभिन्न समूहों द्वारा एक प्रभावी टीका बनाने के प्रयासों के बारे में पढ़ रहे हैं। वैक्सीन या टीका जैविक पदार्थों से बना द्रव्य है. जो शरीर के अंदर रोग प्रतिरोधक क्षमता  को बढ़ाकर शरीर में उत्पन्न होने वाले सूक्ष्मजीवों को नष्ट करने का काम करती है.

यदि vaccines नहीं होते तो हम अपने जीवन का आधा हिस्सा जानलेवा बीमारियों से लड़ते हुए निकाल देते। वैक्सीन वाकई धन्यवाद योग्य है जिनके कारण हमने कई संक्रामक भयानक बीमारियों को धरती से जड़ समूल नाश कर दिया है। वैक्सीन वह कवच है जो एक देश की जनसंख्या को स्वस्थ और कार्यशील रखने में मुख्य भूमिका अदा करता है जिससे जीवन स्तर अच्छा होता है, देश की आर्थिक स्थिति सुधरती है और अमूल्य मानव संसाधन लम्बे समय तक योगदान दे पाता है।

आइये जानें वैक्सीन शब्द का इतिहास

सन 1796, ये वो दौर था जब भारत में ईस्ट इंडिया कम्पनी का शासन अपनी जड़ें जमा चुका था, वारेन हेस्टिंग्स और लार्ड कार्नवालिस के बाद जोनशोर को भारत मे गवर्नर जनरल बनाया गया था। तब पूरी दुनिया और यूरोप के लिए भी चेचक एक भयानक महामारी था।
ऐसे में बर्कले इंग्लैंड के एक डॉक्टर महामारी का मुकाबला करने के समाधान के साथ आये जिनका नाम था एडवर्ड जेनर।

इंग्लैंड में लोक प्रचलित एक मान्यता थी कि  “जिसे (cowpox) यानी गोशीतला हो चुका है उसे चेचक नहीं हो सकता”। Edward Jenner ने इस मान्यता को हल्के में नहीं लिया।  इसी को आधार मानकर जेनर ने चेचक के टिके का अविष्कार किया। Cowpox disease गायो के थनों पर पड़ता है और जो भी इस रोग से पीड़ित गाय का दूध दुहता है उसे यह बीमारी हो जाती है। इस रोग से छोटे छोटे घाव-फुंसियां हाथों में हो जाते हैं लेकिन रोगी को कोई विशेष कष्ट नहीं होता।

जेनर ने इस कथन का परीक्षण करने का निश्चय किया। उन्होंने गौ-शीतला से पीड़ित महिला के घाव से कुछ द्रव लिया और उसे  पांच साल के जेंमस फिप्स को इंजेक्ट कर दिया। बच्चे को गौ-शीतला का हल्का-सा प्रकोप हो गया। 7 सप्ताह बाद जेनर ने एक अन्य चेचक पीड़ित व्यक्ति के घाव से पस निकालकर उस लड़के को इंजेक्शन लगा दिया। James Phipps  को चेचक निकलने की कोई शिकायत न हुई।

और इस तरह दुनिया को 1796 में उसका पहला Smallpox वेक्सीन मिला। जेनर ने अपने शोध को 1798 में ‘An Inquiry into the causes and Effects of the Variolae Vacciniae’ शीर्षक से प्रकाशित किया।

Latin में Cow यानी गाय को Vacca कहते हैं। लैटिन शब्द Vaccacinus का अर्थ होता है of or relating to Cows यानि गाय से संबंधित। वैक्सीन और वैक्सीनेशन दोनों ही शब्द का उपयोग cowpox virus से लिया गया जिसे Vaccinia Virus भी कहा जाता है। Vaccination शब्द का प्रयोग सबसे पहले एडवर्ड जेनर ने ही किया था।

वैक्सीन काम कैसे करते हैं?

हमारी इम्यून सिस्टम को भेद कर जब पैरासाइटिक जीवाणु विषाणु शरीर में प्रवेश करते हैं तब वे Host बॉडी में टॉक्सिन उत्पन्न करके बीमारी को जन्म देते हैं। इसके परिणाम स्वरूप शरीर की कोशिकाएं यानी बॉडी सेल्स कीटाणुओं की आक्रामक प्रगति के विरोध में स्वाभाविक प्रतिक्रिया द्वारा एंटीटॉक्सिन और एंटीबॉडी उत्पन्न करते हैं।
Antibodies हमारे शरीर में बीमारी उत्पन्न करने वाले जीवाणु के ऊपर अपना घातक प्रभाव डाल कर उन्हें खत्म कर देते हैं और हमें स्वस्थ रखते हैं। अगर हमारे शरीर में रोग से लड़ने वाले एंटीबॉडीज पहले से ही मौजूद हूं तो बाहरी संक्रामक जीवाणुओं से बचना आसान हो जाता है। जैसे एक बार चेचक होने पर उसके एंटीबॉडी बन जाते थे फिर चेचक होने की संभावना क्षीण हो जाती ।
कुल मिलाकर वैक्सीन का काम शरीर में इम्युन सिस्टम को डेवलप करना है.

Edward Jenner के बाद लुई पाश्चर प्रसिद्ध हुए जिन्होंने 19वीं शताब्दी में Jenner टेक्निक का आविष्कार किया, जिसके अंतर्गत बीमार करने वाले जीवाणु की मारक क्षमता को ही घटा दिया गया जिससे वे संक्रमित करने की क्षमता ही खो दें।

साल 1894 जब भारत में लाला लाजपत राय ने पंजाब नेशनल बैंक का गठन किया उस वर्ष  पहली बार अमरीका में पोलियो महामारी का प्रकोप आया और पोलियो विषाणु का संक्रामक रूप देखा गया।

इसके बाद 56 साल बाद 1950 में डॉक्टर Jonas Salk ने निष्क्रिय पोलियो विषाणु से वैक्सीन बनाया, जिसे आज Salks वैक्सीन के नाम से जाना जाता है। कहा जाता है इस वैक्सीन के बनने के बाद जॉन साल्क रातों रात हीरो बन गए थे।  वैक्सीन बनने के लगभग पाँच साल बाद 1955 में यह दवा प्रयोग में आयी।
Oral Polio का अविष्कार Dr. Albert Sabin ने किया जिसे 1961 से उपयोग में लाया गया।

1919  के दौर  में जब भारत में जब भारत पर ब्रिटिश शासन का अत्याचार अपने चरम पर था  उसी समय वैज्ञानिक रूप से फल फूल रहे आज़ाद देश अमेरिका में मॉरिस हिलमेन नाम के एक व्यक्ति का जन्म हुआ जो आगे जाकर महान अमरीकी माइक्रोबायोलॉजिस्ट बना। मोरिस हिलमेंन ने Vaccinology में स्पेशलाइजेशन हासिल की और 40 से ऊपर टीको का आविष्कार किया, जिनमें प्रमुख हैं – measle, mumps, hepatitis A, hepatitis B, Chicken Pox, meningitis, pneumonia  यह लिस्ट काफी लंबी है।

आप जानते हैं भारत दुनिया का सबसे बड़ा वेक्सीन निर्माता है।  द सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंडिया सन 1966 में वैक्सीन किंग ऑफ इंडिया साइरस एस पूनावाला द्वारा स्थापित की गई भारतीय बायोटेक्नोलॉजी एंड फार्मास्यूटिकल कंपनी है जो पीडियाट्रिक वैक्सीन बनाती है। उत्पादित और बेची जाने वाली खुराक की संख्या के आधार पर पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया दुनिया के सबसे बड़े वैक्सीन निर्माता हैं।
1.5 बिलीयन doses प्रतिवर्ष । जिसमे से 80% एक्सपोर्ट किया जाता है।

कितने तरीके से दिए जाते हैं टीके?

इसे कई माध्यमों जैसे कि इंजेक्शन, मुंह से पिला कर या फिर सांस के जरिए इनहेल कराकर दिया जाता है. इसके अलावा नोजल स्प्रे यानी कि नाक से डालकर भी दिया जाता है.

दुनिया भर में जगह-जगह antivaccination मूवमेंट चलाए जाते हैं, जिनमें लोगों ने जानवर से जुड़े पदार्थों का प्रयोग , धार्मिक कट्टरवाद , ऑटिज्म होने जैसे कई कारण दिए। हालांकि ये निराधार हैं और वैक्सीनेशन ना कराना एक बड़ी जनसंख्या को खतरे में डाल सकता है।वैक्सीन न केवल बीमारी को कंट्रोल करने में मदद करता है बल्कि जिन लोगों में वायरस का संक्रमण अभी नहीं हुआ है उनमें भी इम्युनिटी का विकास कर बीमारी को फैलने से रोकने का काम करता है.

एडवर्ड जेनर ने हमेशा निःशुल्क वैक्सीन वितरण व्यवस्था का पक्ष लिया जिससे वैक्सीन हर किसी को उपलब्ध हो सके और यह न देखा जाए कि वे कौन हैं और कहाँ से आ रहे हैं।

कहानी वैक्सीन की श्रृंखला में अगले सप्ताह हम सुनेंगे वैक्सीन एक्ट , WHO की सहभागिता, भारत और वैक्सीनेशन साथ ही चर्चा होगी की क्या कुछ चल रहा है भारत और विश्वभर में  कोरोना वैक्सीन के इंतज़ाम करने की दिशा में।