नमस्कार श्रोताओं, मैं प्रज्ञा मिश्र स्वागत करती हूँ आप सबका , शतदल पर आज के पॉडकास्ट में। दोस्तों पोस्ट कोविड दिनों में हमारे पास काफी सारे खाली समय रहने लगा है क्योंकि हम लोगों से कम मिलते हैं, कम हैंगआउट करते हैं और अधिकतर घर पर ही रहते हैं।
खाली दिमाग शैतान का घर, तो इस स्थति मे
में बहुत से लोग creative writing यानी रचनात्मक लेखन की तरफ भी झुक रहे , आइये जानें क्या है रचनात्मक लेखन।

जब लेखक अपनी मौलिक अभिव्यक्तियों को रचनात्मक तरीके से प्रस्तुत करते हैं, तब वह कहलाता है रचनात्मक लेखन।  रचनात्मक लेखन  रचनात्मक सोच को विकसित करती है। इस प्रकार के लेखन के उदाहण हैं –
उपन्यास, लघु कथाएँ, कविता, निबंध, पटकथा लेखन ।

रचनात्मतक लेखन ही सृजनात्मक लेखन है, जिसमें किसी बात को नए तरीके से या नए उपमानों के साथ प्रस्तुत किया जाता है, रचनात्मकता विचारों का उद्गम स्थल होती है, यह निर्मल गोमुख धारा है, जिसमें अभव्यक्ति हॄदयतल से फूटती है, इसमें आडम्बर, बनावटी साज सज्जा का स्थान नहीं होता।

हमने कालांतर में तमाम मौलिक रचनाओं को कलजयी होते देखा है और सैकड़ों साल बाद भी उनसे प्रेरित होते रहे हैं।
कबीर, तुलसी, ख़ुसरो, बिहारी, दिनकर, अज्ञेय, जयशंकर प्रसाद ,प्रेमचंद, रेणु नाम लेते जाएं जैसे जप के लिए हों किसी ईश्वरीय तत्व की साधना। यही है रचनात्मक लेखन का असर वह कालजयी रचना को जन्मदेती है।

पर हम बच्चों को  ये नहीं कह सकते कि बेटा नहीं ये क्या लिख डाला तुमने इसको कौन पढ़ना चाहेगा। उनकी कोमल अभिव्यक्तयों को स्थान देकर उन्हें प्रोत्साहित करना रचनात्मक सोच के पालने में जीने बराबर है। बच्चों को हमें बताना चाहिए कि बेटा एक डायरी पास में हमेशा रखो और किसी बात को देख कर तुमको कैसा लगा वह एक जगह लिख लो इससे तुममें चीजों को देखने का अलग नज़रिया विकसित होगा। ऐसा करने से अविष्कार करने वाली बुद्धि के बच्चे बनेंगे, समाज का रिनेसाँ है रचनात्मक लेखन जहाँ आदमी बीजगणित का भी होता है और कैनवास की तूलिका का भी होता है। रचनात्कम लेखन हमारे मन में घर कर गए रूढ़ियों को तोड़ता है , हमें उतना ही सरल होना सिखाता जितना सरल सृजन है।

अब बात आती है कि क्या नहीं है रचनात्मक लेखन तो दखिये आम तौर पर रोज़मर्रा में पढ़े जाने वाला समाचार, आपसी पत्राचार, परीक्षा में लिखे गए उत्तर, बिलबोर्ड पर लगी सूचनाएँ, नहीं है रचनात्मक लेखन। ऐसा लेखन विषय वस्तु लेखन होता है, यानी की content writing । इसमें उपलब्ध सूचना की अवधि कम होती है। विषय वस्तु लेखन किसी एक दिन, या किसी खास सन्दर्भ को ध्यान में लिखा जाता है । किसी की रचना को आधार बना कर उसपर क़ई गयी टीका टिपण्णी भी नहीं है रचनात्मक लेखन क्योंकि वह किसी दूसरे के सृजनात्मकता की अपने शब्दों में व्याख्या मात्र है।

रचनात्मक लेखन और विषय वस्तु लेखन रोज़गार की दो अलग विधाएं हैं। आज हिंदी समाज सेवा से ऊपर उठकर धनार्जन का स्रोत बनकर उभर रही है। समय के साथ चल रही है । आज कल मोबाइल एप्स, वेब कंटेंट, ऑनलाइन टीचिंग के लिए विषय वस्तु लेखक की पुरज़ोर माँग है, परन्तु इसका मतलब यह नहीं की रचनात्मकता बैक सीट पर चली गयी। रचनात्मक बने रहने के लिए किया गया अध्ययन हमारी मौलिकता को पुख़्ता करता है जिससे हम लम्बे समय तक किसी भी फील्ड का बाज़ार कैप्चर रख सकते हैं क्योंकि नई सोच ही नई संभावनाओं को जन्म देती है और हर नई संभावनाओं के साथ खुलते हैं अवसर के नए पट।

लॉक डाउन में मैंने तय किया है कि लिखना पसंद है तो सीखना भी पसंद है। कोई लेखकीय डिसेंट्री थोड़े न हुई पड़ी है कि आदमी लिखता जाए और भीतर नया कुछ आत्मसात कर ही न पाए। अच्छा लिखने के लिए ज़रूरी है अच्छा पढ़ना।
अब दुनिया को ज़्यादा से ज़्यादा रचनात्मक सोच की ज़रूरत है क्योंकि बंद डिब्बे सी ज़िन्दगी को किसी प्रिज़्म में तब्दील कर देना होगा, एक आशा की किरण को सात रंग फुट कर बाहर निकलना होगा।

रचनात्‍मक लेखक बनने की सबसे बड़ी योग्‍यता भाषा पर अच्‍छा नियंत्रण है। इसके साथ ही समय-समाज और जिस विषय पर लेखन करना है, उस पर अच्‍छी पकड़ और समझ होनी चाहिए। पंच लाइन और कम से कम शब्दों में अभिव्‍यक्ति का हुनर होना भी जरूरी है।

जिस विषय को आपने पसंद किया है उस पर 
अपने विचारों को लिख लें, उस पर सोचें अपने दोस्तों से उस विषय पर चर्चा कर लें। किताबों, अखबारों और इंटरनेट से और अधिक जानकारी एकत्र करें।

जानकारी एकत्र हो  जाए तब उसे क्रमवार प्रस्तुत करना जरूरी है। जानकारी होने से ज्यादा ज़रूरी  है जानकारी की आकर्षक प्रस्तुति। आकर्षक अभिव्यक्ति लेखन को प्रभावशाली बनाती है।  पूर्व निर्धारित स्वरूप, की पहले क्या आएगा, उसके  बाद और बीच में क्या आएगा और लेख का अंत कैसे होगा, यह मेंटली तैयार करना ज़रूरी होता है।

आइये आपको पाँच रचनात्मक विधाओं के बारे में बताएं।

1. काव्य
2. कहानी
3. निबंध
4. नाटक
5.उपन्यास

वियोगी होगा पहला कवि, आह से निकला होगा गान छलक कर आँखों से उसकी बही होगी कविता अनजान।

काव्यकविता या पद्य, साहित्य की वह विधा है जिसमें किसी कहानी या मनोभाव को कलात्मक रूप से किसी भाषा के द्वारा अभिव्यक्त किया जाता है। भारत में कविता का इतिहास और कविता का दर्शन बहुत पुराना है। इसका प्रारंभ भरतमुनि से समझा जा सकता है। कविता का शाब्दिक अर्थ है काव्यात्मक रचना या कवि की कृति, जो छन्दों की शृंखलाओं में विधिवत बांधी जाती है।

कहानी, हिन्दी में गद्य लेखन की एक विधा है। … मनुष्य के जन्म के साथ ही साथ कहानी का भी जन्म हुआ और कहानी कहना तथा सुनना मानव का आदिम स्वभाव बन गया। इसी कारण से प्रत्येक सभ्य तथा असभ्य समाज में कहानियाँ पाई जाती हैं। हमारे देश में कहानियों की बड़ी लंबी और सम्पन्न परंपरा रही है।

निबन्ध (Essay) गद्य लेखन की एक विधा है। लेकिन इस शब्द का प्रयोग किसी विषय की तार्किक और बौद्धिक विवेचना करने वाले लेखों के लिए भी किया जाता है। निबंध के पर्याय रूप में सन्दर्भ, रचना और प्रस्ताव का भी उल्लेख किया जाता है।

नाटक काव्य और गध्य का एक रूप है। जो रचना श्रवण द्वारा ही नहीं अपितु दृष्टि द्वारा भी दर्शकों के हृदय में रसानुभूति कराती है उसे नाटक या दृश्य-काव्य कहते हैं। नाटक में श्रव्य काव्य से अधिक रमणीयता होती है। श्रव्य काव्य होने के कारण यह लोक चेतना से अपेक्षाकृत अधिक घनिष्ठ रूप से संबद्ध है।

एक उपन्यास गद्य कथा का एक कथात्मक काम है जो एक विशिष्ट लंबाई पर विशिष्ट मानव अनुभवों के बारे में एक कहानी बताता है।

गद्य शैली और लंबाई, साथ ही काल्पनिक या अर्ध-काल्पनिक विषय वस्तु, एक उपन्यास की सबसे स्पष्ट रूप से परिभाषित करने वाली विशेषताएं हैं। महाकाव्य कविता के कार्यों के विपरीत, यह कविता के बजाय गद्य का उपयोग करके अपनी कहानी कहता है ; लघुकथा के विपरीत , यह एक संक्षिप्त चयन के बजाय एक लंबी कथा बताता है। हालांकि, अन्य विशिष्ट तत्व हैं जो उपन्यास को एक विशेष साहित्यिक रूप के रूप में अलग करते हैं।

एक रचनात्मक लेखक कभी तटस्थ रूप से दुनिया की ठोस चीजों के बारे में बात करता है तो कभी भावविह्वल होकर वह प्रेम, पवित्रता, पलायन, ईश्वर, नश्वरता आदि विषयों के बारे में अपने उद्गार व्यक्त करता है। अन्यथा लेखन में वह अपनी अपूर्व कल्पना का इस्तेमाल करता है।

आज के लिए बस इतना ही इस चर्चा को हम अपने आने वाले एपिसोड्स में और बढ़ाएंगे। आशा करती हूँ, रचनात्मक लेखन के प्रति और जानने समझने में आपकी रूचि बढ़ी हो और अध्ययन उन्मुख हों

मैं प्रज्ञा मिश्र अब आप सबसे विदा लेती हूँ। जीवन में सीखने सिखाने के लिए ततपर रहें और अपना बेस्ट दें। आज का एपिसोड आपको कैसा लगा कॉमेंट कर के हमें ज़रूर बतायें , किसी विषय पर आपको एपिसोड सुनने की इक्षा हो तो अपने सुझाव ज़रूर कॉमेंट करें।