जो लोग दूसरों की खुशी और सफलता में दिल से खुश होते हैं वे खुद भी सफलता की ओर अग्रसर होते हैं, ऐसी सफलता स्थायी और स्थिर होती है। यह सीने में जलन नहीं देती, हर समय पीछे हो जाने का भय नहीं देती, नया कुछ करने का हौंसला देती है। ऐसे लोगों के चेहरे की स्मित रेखा में एक जादू होता है , आकर्षण होता है, ये लोग हमेशा सुखी हैं ऐसी बात नहीं, लेकिन कष्ट में संयम नहीं खोते, रहन सहन के तरीके , खान पान में भी स्वछता रखते हैं जिससे सोच हमेशा ऊँची रहे।

हमें कैसा जीवन चाहिए इसका बहुत बड़ा अंश हम अपनी बॉडी लैंगुएज , हाव भाव, सोच और अपने आस पास की साफ़ सफाई से आकर्षित कर लेते हैं। दुःख रहेगा क़ई क़ई रूप में रहेगा, उसमें कछुए जैसा होना आना चाहिये। किसी की सफलता देख दिल जलता हो तो आदमीयत में खुद को बदलना चाहिये।

अपने ऊपर काम करना दुनिया में सबसे ऊँचे दर्जे का काम है इससे हमें हम एक पूरा समाज तैयार कर सकते हैं जिसमें अधिक से अधिक लोग सकारात्मक रूप से सूखी हैं। हर रोज़ एक अच्छी आदत जोड़ना है , एक बुरी आदत को छोड़ना है।यही हमारी पीढ़ियों के लिए श्रेयस्कर भी है।

Pragya Mishra