देश में राजनीतिक प्रक्रिया में चयन होने वाले लोगों की परीक्षा होनी चाहिए।

जैसे गाड़ी ड्राइव करने से पहले एग्जाम पास कर के लाइसेंस लेना होता है वैसे जो जिस मंत्रालय का है उसके पास उसका कोई अनुभव होना चाहिये।

निश्चित पढ़ाई किये हुए व्यक्ति को ही देश के शीर्षस्थ पदों पर जाने देना चाहिये।

रैली के बजाय टी वी डिबेट्स ही प्रतिनिधियों के चयन राय आदि बनाने का आधार होना चाहिये।

राजनीति शास्त्र की पढ़ाई अनिवार्य भी होनी चाहिये और नेताओं को पीपल मैनेजमेंट, डिसास्टर मैनेजमेंट आदि में सर्टिफिकेट प्रोग्राम करना अनिवार्य होना चाहिये।

जैसे एक डॉक्टर आजीवन पढ़ता है, वकील पढ़ता है वैसे सभी नेताओं के लिये मानदंड तय होना चाहिये की बाहुबली होकर चौड़े होने के दिन लद गए भारत में।

हमारे देश की सरकारों को धर्म तुष्टिकरण में इतना आनंद आता है कि मूलभूत सुविधाओं का सेक्टर खर्च छोटा करती जाती है। वैज्ञानिक तरीके से किसी भी प्रोग्राम का लॉंगटर्म फायदा एनालाइज कर के ही प्रोग्राम शुरू करना उसपर खर्चा करना चाहिये ।

प्राइमरी शिक्षा और स्वास्थ पर अच्छा खासा खर्च करना लांग टर्म में देश को समृद्ध बनाएगा ।

आज की हकीकत ये है कि हमारे नेता एक पंगु भारत चाहते हैं ताकि कम मेहनत में उनको मलाई मिलती रहे।

प्रज्ञा मिश्र, मुम्बई