Srinivas BV , Indian Youth Congress के लीडर हैं, पूरा भारत साक्षी है किस तरह उनकी टीम ने कोविड संसाधनों की Last Mile Connectivity ensure की। वे युवा शक्ति की तरह उभरे और सभी ज़रूरतमन्दों तक जान पर खेल कर गए। उन्होंने पूरे कोविड माहौल में खास कर मार्च अप्रैल 2021 के भारतीय कोविड सुनामी में अदम्य साहस दिखाया और टूटी हुई जनता का सहारा बने।

मदद यह देख कर नहीं की जाती कि कौन किस पार्टी का समर्थक है या कौन कितना बड़ा है, इसी को चरितार्थ किया IYC के श्रीनिवास ने। हमने ट्विटर पर यह भी देखा था कि स्वयं न्यूज़ीलैंड का दूतावास भी उनसे मदद मांगता पाया गया था और बाद में राजनीतिक रंग देकर ट्वीट डिलीट करवाया गया।

भारत मे संसाधन कम हैं ऐसा नहीं है। कमी है नीयत में। ब्यूरोक्रेसी की आदत ऐसी पड़ी है कि अच्छा करता हुआ आदमी सिस्टम के आगे खतरे खड़े कर सकता है सिस्टम पर सवालिया निशान खड़े कर सकता है इसलिए सिस्टम अपनी मशीनरी का प्रयोग कर के सामने डटे सच्चे देशभक्त , जनता से प्यार करने वाले, नीयत में मदद का भाव रखने वाले से डर कर उसको मज़ा चखाने और पावर दिखाने का दम भरता है।

SrinivasBV से क्रिमिनल की तरह पूछ ताछ गलत बात है। इस प्रकार तो भारत #सरकार अपने प्रति जनाक्रोश का जुगाड़ कर रही है।

जिसने विषम परिस्थिति में नागरिक सेवा की अच्छा काम किया उसको सम्मान दिया जाता है। वॉर टाइम हीरो के जैसे हैं #srinivasiyc ।

एक तरफ आप कह देते हैं, सब ठीक है, कोई विप्पति नहीं है, सब चंगा सी। यह बोल कर अपने कर्तव्यों से पल्ला झाड़ लेते हैं, और मरती क्या न करती जनता इधर इधर से मदद जुगाड़ करती है तो मदद करने वाले को आप बोल रहे हैं कि इसपर धारा लगाओ, इसके सम्पत्ति जब्त करो ये पैनिक क्रिएट करता है? ये कैसे समय मे ले आये भगवान हमें ,हम अपने परिजनों के मृत्यू का शोक नहीं मना पाते, उनको इज़्ज़त की अंतिम यात्रा नहीं दे पाते और किसी से मदद मांगने और मदद करने के नाम पर क्रिमिनल घोषित कर दिये जाते हैं , ये कैसे अनुचित समय मे भारत आ फंसा है?

जो व्यवस्था कहीं थी ही नहीं वो तार तार होकर दुनिया के सामने उधड़ गयी तो दुःख हो रहा है हमें कि भारत कि इज़्ज़त मिट्टी में मिल गयी लेकिन ये न सोचा कभी कि इतना सब होने के बावजूद हमारी प्राथमिकता इमेज बचाना रही , जान बचाने की नहीं।

मोदी जी अपने भाषण में खुद बोले थे जनता को छोटी छोटी कमेटियों में आगे आना चाहिये। अब वैसा ही सबने किया भी। बल्कि उनके बोलने से पहले अप्रेल के पहले वीक में जनसेवा शुरू हो चुकी थी। वो तो बंगाल चुनाव में थे। यहां तक कि कुम्भ पर भी निर्णय लेट से लिये थे। गलती पर गलती हुई। सबने कहा था सेकंड वेव रहेगा मार्च में , वह झोंके में एप्रैल में आय्या। कोई ठोस व्यवस्था न होने से कितने अज़ीज़ मरे, भटक भटल कर मरे। सोशल मीडिया पर सबने हाथ थामा। उसमे श्रीनिवास, सोनुसूद, कुमार विश्वास चमक कर सामने आए। इन टीमों से मिलकर प्रधामनमंत्री और गृह मंत्री को प्रशंसा करनी चाहिये थी। ऐसा करने से मोदी जी को और जनता का स्नेह मिल जाता कि इतने बड़े पॉपुलेशन वाला देश है चलो मान लिए संसाधन कम पड़ गया कम से कम मोदी जी अपने हीरो लोग को अपने जनता को मानते तो हैं। पर वे तो घमंडी पिंसिपल के जैसे होनहार छात्र को ही सबक सिखाने में अलग थलग कमरे में दुबक लिए हैं। ये बुरा लगता है। आपस ने लीडर सच का प्यार औऱ साथ दिखाए तो सुविधा की कमी भी इंसानी दिल झेल जाता है लेकिन अबके ठेस लगी है।

मोदीसरकार ने भारत में मदद करना भी अपराध की श्रेणी में शामिल कर दिया है। ये दिल दुःखाने वाला काम कर रहे हैं क्योकि भारतीय आम जनता तो इतने लीगल दांव पेंच भी नहीं जानती , आज श्रीनिवास को तंग किया जा रहा है कल हर उस व्यक्ति को तंग करेंगे जिसने सोशल मीडिया पर मदद की पोस्ट्स पर काम किया।

अपना देश , अपने लोग, मदद किया तो दोषी के जैसे व्यवहार हो रहा है #मोदीजी के राज में यही #अच्छेदिन हैं। हमने जिन लोगों को उनके अदम्य साहस के लिए 26 जनवरी पर अवार्ड लेते अब तक सुना था अब वैसे साहसी बहादुरों को अपराधी की तरह कटघरे में देखेंगे। कैसे कोई दिल बड़ा कर के खुद को मुसीबत में रख के कौन आगे आएगा किसी के लिए अब ! काले अंग्रेज़ की उपाधि बिल्कुल सटीक है ऐसी असम्वेदनशील सरकारों के लिए।

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