मेरा कोविड वेक्सिनेशन अनुभव – 2

जीवन में यदि इतनी फुर्सत हो कि खाना पानी सफाई और घर बाहर के काम कोई और निपटाता जाए वो भी पूरी ईमानदारी से तो किसी अध्याय या घटना विवरण को पूरा लिखने के लिए ब्रेक्स लेने की ज़रूरत ही नहीं पड़ेगी।

लेकिन न तो हम अनवरत कलम लिए बैठ सकते हैं न ऐसा करने से अच्छा कंटेंट निकल कर आता है इसलिए छोटे से ब्रेक के बाद मेरे वेक्सीनेशन अनुभव की आगे की यात्रा कुछ इस प्रकार है।

27 मई को रात आठ बजे जब यह समझ आया कि कंपनी के वेकसिनेशन अभियान से लाभ लेने के लिए COWIN reference ID ज़रूरी है तो मैंने जल्दी रेजिस्ट्रेशन करना शुरू किया। पहले COWIN मोबाइल एप download करा उसमें लॉगिन में दिक्कत आयी।
बिना समय गवाए कोविन के वेब लिंक (cowin.gov.in/home) पर गए, यहाँ आसानी से मोबाइल नम्बर लेकर रेजिस्ट्रेशन हो गयी। एप में रेजिस्ट्रेशन करते समय OTP नहीं जनरेट हो रहा था जो वेबलिंक से आसानी से हुआ।

कम्पनी के पोर्टल पर COWIN की रेफरेंस ID डालने के बाद मैंने रेजिस्ट्रेशन प्रोसेस पूरा किया।

कोविन में रेजिस्टर करने के दौरान मैंने मेरा पहचान पत्र पैनकार्ड दिया आधार नहीं। इसलिए सेंटर पर वेरिफिकेशन के दौरान मैंने आधार और पैन दोनो अपने पास रखा।

आइडेंटिटी कार्ड

रात में सब जुटा लेने के बाद मुझे याद आया कि चूंकि मार्च 2020 से ऑफिस नहीं गयी हूँ तो न जाने अपना I card कहाँ रख दिया। फिर चारो तरफ खोज चालू हुई जो रात एक बजे तक चली , कहाँ तो जल्दी सोना था फ्रेश रहना था कहाँ पहचान पत्र ढूंढने में मैं थकी पड़ी थी।

इग्नू के एग्जाम से पहले इग्नू का पहचानपत्र, ऑफिस के काम से पहले ऑफिस का पहचानपत्र मेरी सारी चीज़ें गायब होती रहती हैं।

आलोक हमेशा की तरह शान्त लेटे हुए थे उनको कोई टेम्परेचर नहीं आता है मैं उठक बैठक कर के सारे तहखाने टटोल रही थी कि मेरी I card की बच्ची आखिर तु गयी कहाँ।

अपने दिमाग, अपने जीवन , अपनी अलमारी, अपनी किताबों , अपनी चीजों के बीच फैली अव्यवस्था से बाहर आना मेरे जीवन का ध्येय है क्योंकि यही वो चीजें हैं जो मुझे मेरे बेस्ट को हासिल करने से रोक रही हैं।

हार कर जब I card नहीं मिला तो मैंने मेरे कलीग्स मितेश, अरविंद, स्वप्नना , विनीता, दीपिका, सबको मेसेज किया सबने सुझाव दिए कि तु HR से बात कर , तु वन डे पास का प्रोसेस देख, वगैरह।

दीपिका ने बोला
“गुम गया है तो FIR करनी पड़ेगी। अभी तुम एक काम करो अपने मन मे Chant करो “I reach” और सोचो कि I card तुम्हारे हाथ मे है और उसे लेकर तुम आराम से अंधेरी ऑफिस का सेक्यूरटी क्लीयर कर गयी हो और सब आराम से हो रहा।”

एक मिनट के लिए मैं मेसेज पढ़ कर अचरज में पढ़ गयी फिर याद किया कि अरे ऐसी तो मै भी हूँ सलाह नहीं देती कि सामने वाला क्या बौरा गयीं सोचेगा। पर दीपिका और मैं हमेशा बात रहते हैं इसलिए दीपिका जानती थीं कि मैं उनकी इस बात पर सहज भरोसा कर लूँगी।

मैने अपनी तरफ मुस्करा कर दीपिका को लिखा।
” I believe” मैं ऐसा ही करुँगी ….

क्रमश: