नचारी 1 – podcast suno

आब कते दिन रहबै बाबा
ध्यान मग्न कैलाश
हमरा सबहक अहीं सहारा
दोसर पर नहि आश ।

भांग निसां सँ जगियौ दानी
मचि रहल कोहराम यौ
चारू दिस हरहोर मचल छै
सबहक देवता बाम यौ
सत्य कहै छी आबिकय देखियौ
हैत तखन विश्वास
हमरा सबहक अहीं सहारा
दोसर पर नहि आश ।

रोग व्याधि से सब दिस पसरल
गान्ही लागल लोक छै
रंग विरंगक उधबा उठय
घरे घरे शोक छै
चिंता सँ सगरे सब व्याकुल
अहींक सबटा दास
हमरा सबहक अहीं सहारा
दोसर पर नहि आश ।

सब अपराध के छेमियौ शंभु
अपने छी औढरदानी
अहांक महिमा के नहि जानय
भरि जग मे छी जगजानी
मणिकांतो के आर्त निवेदन
आयल अपनेक पास
हमरा सबहक अहीं सहारा
दोसर पर नहि आश ।

-मणिकांत झा, दरभंगा,१५-१०-२५

नचारी 2

विनय सुनू गौरी पति शंभू शरण जानि हम आयल छी
सकल जगत में घूमि फीरिक’ दर दर सँ ठोकरायल छी।।
जीवन भरि हम पाप बटोरल नहि कयलहुँ सेवा पूजा
देवता बस अपने के बूझी नाम ने जानल हम दूजा
माया ममताक विकट जाल मे पूर्वहि सँ ओझरायल छी
विनय सुनू गौरी पति शंभू शरण जानि हम आयल छी।
देवक देव कहाबी अपने शिव शंकर भोला दानी
आशुतोष अछि नाम अहाँ के बच्चे सँ हमहूँ जानी
कृपा दृष्टि पयबा लेल बाबा भीतर सँ औनायल छी
विनय सुनू गौरी पति शंभू शरण जानि हम आयल छी।
अढरण ढरण महादेव हे हर बिसरु नहि हमरा अपने
गाल बजायब भांग पियायब हुकुम करब अहाँ जखने
मणिकांत अहींक बल पर बाबा सब दिन हम अगरायल छी
विनय सुनू गौरी पति शंभू शरण जानि हम आयल छी।
-मणिकांत झा , दरभंगा, ६-२-१९ । दलसिंहसराय धर्मशाला ।

नचारी 3

सगर नगर आतंकक साया
सहमल छै एक एक प्राणी
सबहक टीपनि एकहि रंगक
भेलै कोना शंकर दानी।

जानक डर सबके सन्हिएलै
घर घर मे रहय दुबकल
काल कोरोना धय ने लीय
संशय सँ सदिखन दुबकल
जानि ने कोना आब उबरबै
संकट सँ हे शूलपाणी
सबहक टीपनि एकहि रंगक
भेलै कोना शंकर दानी।

सूक्ष्म भेष मे ई आतंकी
जन जन के छै डरा रहल
बाले बच्चे बूढ़बा बूढ़िया
जान बचाकय पड़ा रहल
कखन कतय ककरा ध’ लेतै
हे हर से हम नहि जानी
सबहक टीपनि एकहि रंगक
भेलै कोना शंकर दानी।

सुनय छलहुँ अपने त्रिपुरारी
कालक काल कहाबय छी
केहनो विपदा सन्मुख आबय
छन्नहि दूर भगाबय छी
भ्रमित मन मणिकांत बूझाबी
आशुतोष औढर दानी
सबहक टीपनि एकहि रंगक
भेलै कोना शंकर दानी।

-मणिकांत झा, दरभंगा, २५-५=२०