दरभंगा के विख्यात मैथिल साहित्यकार कवि गीतकार मणिकांत झा जी से यहाँ मिल सकते हैं

विश्वकर्मा गीत

हाथी चढ़ल विश्वकर्मा जी अयला
आसन ओछाबू ने
कल करखाना ई सबटा बनयला
आसन ओछाबू ने।

गंगाक जल लय चरण पखारु
घृत केर दीप बारि आरती उतारु
बस ट्रेन सब चलयला विश्वकर्मा जी
आसन ओछाबू ने।

भरि दुनियाँ के छथि अभियंता
मशीने मात्र के अपने नियंता
छन मे छनाक करथि विश्वकर्मा जी
आसन ओछाबू ने।

अगर गुगुल के धूप देखायब
मेवा मिसरी भोग लगायब
मणिकांतो के सब दिन देखथिन विश्वकर्मा जी
आसन ओछाबू ने ।

-मणिकांत झा, दरभंगा, १६-९-२०