जाने किस अभाव को पूरा करने के चक्कर में अक्सर कितने अच्छे भले समझदार लोग गलत नकारात्मक रिश्तों के प्रभाव को बार बार आकर्षित करते रहते हैं। जीवन में वर्जित सम्बन्धों का ऐसा कूड़ा जमा करते है जिनको लेकर एक उम्र बाद पछतावा ही पछतावा है।

साथी मिले न मिले अपना साथ नहीं छोड़ना है, अपनी आत्मा मलिन न हो, आत्मा का घर इस जन्म में ये शरीर भी स्वस्थ रहे मन स्वस्थ रहे। पाप पुण्य के मसले नहीं हैं, बस खुद को नुक्सान पहुँचाने की चाह मत करो जिससे अपने दिल के बीच एक कटाव और धँसने का बोध हो जाये। जहां से भी मिले हमें केवल प्यार ही मिलना चाहिये, बिना मिलावट का प्यार। हम सभी प्यारा जीवन डिज़र्व करते हैं। हम सभी सच्चे हैं, हम सभी दिल के अच्छे हैं, अच्छा होना कायरता नहीं है, ताकत है।

प्रज्ञा मिश्र

तालमेल