दोस्तों कोलाहल मने होता है हल्ला और अल्कोहल (Alcohol) मने क्या होता है ये आप सब जानते हैं। इन दोनों शब्दों के हेरफेर से उत्पन्न एक एक मज़ेदार वाकया जिसे याद कर मैं अक्सर हँस पड़ती हूँ , आज यहाँ आप सब से भी साझा करती हूँ।

एक बार की बात है, हमारे गाँव में , मंदिर परिसर में हनुमत आराधना हो रही थी। जो व्यक्ति माइक संचालन कर रहे थे उनको भीड़ शांत करने का ज़िम्मा दिया गया था । उनको बोलना था कृपया “कोलाहल” न करें। परन्तु हड़बड़ी में ज़बान लड़खड़ा गयी और उन्होंने ताबड़तोड़ क़ई बार माइक पर बोल दिया। बहुत “अल्कोहल” हो रहा है, कृपया मंदिर परिसर में “अल्कोहल” न करें…।

बात आग की तरह फैली थी कि परिसर में लोग अल्कोहल यानी शराब का सेवन कर रहे। अब तो भई हर मचान पर चर्चा का विषय एक ऐसी घटना थी जो कभी घटी ही नहीं।

औरतें घोघ यानी घूँघट तान कर फुफुसाने लगीं “आएं बताइए, अल्कोहल नहीं करना चाहिए मंदिर परिसर में” , आदमी लोग बिना पूजन में बाधा बने चुप चाप उसे ढूँढने लगे जो अल्कोहल कर रहे थे। कुल मिला कर एक शाब्दिक हेरफेर से पूरा कोलाहल हो गया पर अल्कोहल नहीं रुका।

प्रज्ञा