अपने ही घर में बचाई जा रही भाषा के दिवस की बधाई। यूँ तो मुझे प्रेम बहुत है भाषाओं से लेकिन हिंदी की उपेक्षित बड़ी माँ वाली स्थिति जो घर साफ करती, कोने में सोती और लिगेसी में ही केवल याद की जाती है उस हिंदी दिवस की बधाई।

एक देश जहाँ का व्हाइट कॉलर दास “नो हिंदी गाइज़” कहने को अपने पद पर सफल और पावरफुल होना समझता है उस देश के नागरिकों को विश्व हिंदी दिवस की बधाई।

एक देश जहाँ आपराधिक तत्व जबरन हिंदी थोपने को राष्ट्रवाद कहते हैं लेकिन खुद क ख ग घ भी नहीं पूरा जानते उस “देंश” के नागरिकों को विश्व हिंदी दिवस की बधाई ।

एक पराधीन मानसिकता के देश में जहाँ शुद्ध हिंदी में वार्तालाप करना और देवनागरी में लिखना पारिवारिक वाट्सप ग्रुप में “बहुत बनती/बनता है” की तरह देखा जाता है उस देश के नागरिकों को विश्व हिंदी दिवस की बधाई।

व्यंग्य से परे थोड़ी सी जानकारी –

10 जनवरी हर वर्ष ‘विश्व हिंदी दिवस’ के रूप में मनाया जाता है।पहला ‘विश्व हिंदी सम्मेलन’ 1975 में 10 जनवरी से 14 जनवरी तक नागपुर में आयोजित किया गया था। पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए 2006 में प्रति वर्ष 10 जनवरी को ‘विश्व हिंदी दिवस’ मनाने की घोषणा की थी। उसके बाद से भारतीय विदेश मंत्रालय ने विदेश में 10 जनवरी 2006 को पहली बार विश्व हिंदी दिवस मनाया था। इसीलिए इस दिन को विश्व हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है।विश्व हिंदी सम्मेलन तीन वर्ष में एक बार होता है। 11वाँ विश्व हिंदी सम्मेलन 18 अगस्त से 20 अगस्त 2018 तक मॉरीशस की राजधानी पोर्ट लुई में हुआ था।

प्रज्ञा मिश्र