लेखक – सूरज प्रकाश

हमें प्रयोग से डर लगता है जैसे स्वीकृति न मिली तो, मुख्य धारा में शामिल न हो पाए तो, वाहवाही न मिली तो। लेकिन कुछ लोग ऐसे होते हैं जो ताज़िन्दगी अपनी धुन में नई लीक बनाते चलते हैं। ऐसे ही लेखक हैं सूरज प्रकाश जी जिनके व्यक्तित्त्व से जितने रूबरू आप होते हैं उतना अचंभित होना लाज़मी है।

बेहद जिंदादिल, जिनकी दाढ़ी उनका ब्रांड भी है, रोचक कथाओं के बादशाह, कला और संगीत प्रेमी ,स्वाध्याय के माध्यम से गुजराती भाषा के विद्वान। कम है इतनी तारीफ़ भी।

radio playback india की VO Artist दीपिका भाटिया की आवाज़ में spotify पर कहानी “खो जाते हैं घर” सुनने के बाद, मैं लेखक महोदय से बहुत प्रभावित हई थी।

स्वर्गीय मन्नू भंडारी जी से जुड़ा रेडियो श्रधांजलि कार्यक्रम करने के दौरान मुझे Suraj Prakash जी को जानने सुनने और विस्तार से पढ़ने का अवसर मिला। सीधे सीधे हिंदी क्षेत्र से नहीं हूँ तो आपसे देरी से भेंट होना ही बड़ा घाटा हो गया ऐसा मैं महसूस करती हूँ। पर देर आयी दुरुस्त आयी।

हाल ही में आपका लिखा उपन्यास पढ़ा
“नॉट इक़व्ल टू लव” – हिंदी का पहला चैट उपन्यास।

यह नया प्रयोग है। हिंदी ऐसे प्रयोग चाहती है क्योंकि हिंदी जिन लोगों के भीतर है उनके जीने रहने सोचने का संसार बदल रहा है।

ऑनलाइन चैट, मेसेंजर,आदि से मनोविकृती के जंजाल याद आ जाते हैं।

तो आखिर क्या ही होगा एक चैट उपन्यास में, हमने तो चैट से बाहर बस लपक झपक स्चरीनशॉट देखे हैं, कहाँ सोची है कोई काम की बात।

यह काम की बात लेखक सूरज प्रकाश जी की प्रयोगधर्मिता ने सोची, उपन्यास में उद्धरित उनके कॉलम “आओ धूप” की तरह ही गिरी है एक नर्म धूप पूरे उपन्यास पर ।

विटामिन डी से भरपूर किरणों जैसे छोटे छोटे सम्वाद। सन्तुलित बयानी चैटिंग की उपयोगिता पर। साथ – साथ इन्टरनेट को कैसे सार्थक किया जाए इसपर भी समझ बढ़ाती किताब।

यहाँ आदर्श वाद जैसा कुछ भी नहीं, यह पूरा यथार्थ है , एकाकीपन से परे एकांत की।ओर जाने का यथार्थ, सागर से मोती ढूंढ अपने संसार में मणियों को सृजित करने का यथार्थ। आप मणियों तक बाधाएं पार कर पहुंचते हैं, आपको ध्येय का पक्का होना होता है।

चैटिंग की दुनिया का सही रास्ता और भटकाव से बचाव का एक प्रयोग है यह उपन्यास जिसपर कितने ही शोध हो चुके और चल भी रहे।

एक बार मैंने एक स्त्री को यहीं सोशल मीडिया पर बड़ी काम की बात लिखते देखा था कि चैट में कई बार लोग चुप चाप आपसे बात करने आते हैं क्योकि उन्हें जीवन में वाकई मदद की ज़रूरत होती है, वे नितान्त अकेले हो चुके होते है। यदि आप मानसिक रूप से मज़बूत व्यक्ति हैं तो सुनकर ज़रूर समाधान कीजिये और काम की बात और बेकार की बात का फ़िल्टर डेवलप कीजिये। बहुतों की मदद हुई है, लोग कर भी रहे हैं। अंतर्मुखी लोगों की मदद करता रहा है चैट ऐप्लिकेशन।

उक्त उपन्यास चूंकि चैट शैली में लिखा गया है, तो पढ़ते पढ़ते आप और जल्दी पढ़ना चाहते हैं क्योंकि मनोवैज्ञानिक रूप से आप दो लोगों की बात चीत पढ़ रहे हैं जो कि छोटे छोटे वाक्यों से बना है। इस शैली को दिमाग जल्दी रिसीव करता है और तकरीबन दो सौ पन्ने की यह किताब तुरन्त पढ़ी चली जाती है।

एक पुरूष और एक महिला के बीच साहित्य संगीत के आदान प्रदान से लेकर और विभिन्न तरह के सवाल जवाब का सिलसिला है जो कभी दर्शन तो कभी मृदु हास्य की पटरी पर चल पड़ता है।

कुछ ऐसे विषयों पर चर्चा है जिसे आम तौर पर घर के लोग कोई राय नहीं रखते या रखना नहीं चाहते। इस उपन्यास की स्त्री पात्र कई स्त्रियों से मेल खाती है। वह पढ़ी लिखी सम्भ्रांत घरेलू औरत है जिसके बच्चे बड़े हो चुके और अब अपने आगे के जीवन को क्या दिशा दे इसपर वो विचार करती जा रही है। उसकी अपनी चिंताएं हैं समस्याएं हैं।

इस उपन्यास के पुरुष पात्र पर रह रह कर गुस्सा तो आता है पर बाल सुलभ स्नेह भी बना रहता है। कहीं कहीं अपको लग सकता है कि यहां लेखक ने स्त्री पक्ष को कम और पुरूष पक्ष को अधिक प्रबल दिखाया है पर वह उम्र के अंतर के कारण भी हो सकता है। कहीं कहीं आपको यह भी लग सकता है कि इस एक किताब में लेखक ने अपनी सभी रचनाओं का उल्लेख कर एक तरह से मार्केटिंग भी की है जो कि देखिए तो बुद्धिमान प्रयोग है। पुरुष प्रधान पहलू को परे रख कर चलना उचित रहेगा क्योकि यहाँ मुद्दा अनुभव का है।

भाषा सरल है, ऐसे रोचक तथ्य है जिनको रेखांकित कर के हम बाद मे भी देखना पलटना चाहेंगे ।

स्त्री का मन इस्त्री कर रखे तह लगे अलमारी में सजाए कपड़ों की खेप जैसा है भीतर की परतें उभरती नहीं। कभी एकाकी मन या तो कभी न छुआ गया कोई कोना बना रहता है। सारी गाँठें खोलने का हुनर इस किताब में धीरे धीरे खुलता है। सबसे ज़रूरी यह तभी सम्भव होगा जब स्त्री अपनी मदद खुद करेगी। यह किताब बस एक टूल है।

मैंने रुक रुक कर धीरे धीरे पढ़ी, नए शब्द सीखे। पॉकेट बुक का पूरा आनंद लिया।

इस किताब में हुई चैटिंग को आदर्शवाद या प्लेटोनिक प्रेम के नाम पर आप yet another justification नहीं कह सकते यह कला के प्रति विशुद्ध प्रेम है जिसमें कोई दो व्यक्ति एक दूसरे को अपना बेस्ट देते हैं ।

INR -125
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Reading time – 3-4 hours

प्रज्ञा मिश्र

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