तुम्हारे होने से ये दुनिया रौशन नहीं है, वो तो सौरमंडल का काम है, तुम्हारे होने से इस दुनिया की रौशनी को एक मकसद मिलता है , तुम इस दुनिया के रौशन रहने की वजह हो क्योंकि अगर तुम न रहोगे तो कौन सराहेगा धूप और चांदनी। कौन महसूस करेगा फूलों पर गिरते प्रकाश से उत्पन्न अद्भुत सौंदर्य को, कौन करेगा परिभाषित ,विभिन्न छटाओं को, रातरानी की खुशबू समझेगा कौन। कौन कहेगा कि सूरज की पहली किरण तुम्हारे हृदय में स्नेह सिक्त भाषा सी उतरी और तुम प्रकृति के प्रेम में पड़ गए। -प्रज्ञा मिश्र