विपन्नता केवल संपत्ति जाने से नहीं होती,
ऐसे लोगों का साथ देने से भी आती है
जो मानसिक रूप से दिवालिया और
स्त्री विरोधी मानसिकता से ग्रस्त हैं
अपना जीवन संभाल नहीं सकते
हर समय उधार मांगने की प्रवृत्ति रखते हैं
नौकरी करने में प्रतिष्ठा की ठेस समझते हैं
हर समय भविष्य काल में बात करते हैं
दरिद्रता का कारण हमेशा दूसरों को बताते
जो सकारात्मकता योग, ध्यान बेकार समझते
और सब समझाने वाले को “कट लो”
अभी के अभी “कट लो” जैसी ठेठ भाषा में
झिड़क कर खुद को अपने गांव का शेर समझते हैं

दुनिया में कुछ लोग ऐसे होते हैं जो अपने अच्छे दिनों में आराम से दारू उड़ाते हैं दोस्तों को भी पिलाते हैं, बिलकुल सेव नहीं करते हैं, साथ रह रहे संबंधियों को बिना खुद को पहले सुरक्षित किए पैसे बांटते रहते हैं एक खोखले विश्वास और एक्सपायर हो चुके आदर्श के लिए। ऐसे लोग बड़बोले होकर बहुत सलाह भी देते फिरते हैं। फिर एक दिन उनके दिन फिरते हैं वो हो जाते हैं कंगाल और उनको याद आती या आता है ऐसा मित्र जो “परिवार” का नही है। वह उनसे उधार लेंगे, लेते रहेंगे। ये दानवीर कंगालकर्ण प्रजाति उधार लौटने के नाम पर इगो बड़ा कर लेती है और मदद करने वाले को लालची करार देती है, ये प्रजाति मदद करने वाले मित्र के सिर पर कानूनची बनती है, उनको तरह तरह से लालची घोषित करती है और खुद जिन लोगों ने उनका उधार नहीं लौटाया उनको परिवार का बोलकर बरी कर देती है।

ये प्रजाति आप पर कानूनी शब्दों से खेलकर सिद्ध करती है कि उन्होंने मांगे ही नहीं अगले ने खुद दे दिया, मांगे तो ये नहीं बोला कि कब देंगे जब होगा तब देंगे जिसकी कोई सीमा नही है और अंत में ये कि वापिस क्या लौटाना है ये उन Ideas का पैसा है उनके हक का जो मित्रता के दिनों में मुफ्त में दे दिया था। इन लोगों का कुछ नही बिगड़ता इनकी हेल्प करने वाले अपने फैमिली मेंबर्स में बुरे बन जाते हैं।

ये दानवीर कंगालकर्ण प्रजाति खुद को आज़ाद शेर कहती है, कि हम तो सर उठा के जीते हैं, किसी के आगे पीछे नहीं करते अपनी दिमागी ताकत और हुनर का कमाते हैं, नौकरी करने वाले साले c*** नंबर एक हैं। ये प्रजाति कहती है कि नौकरी करने वाले केवल जूते चाट कर पैसे कमाते हैं और गुलाम होते हैं। लेकिन ये भूल जाते हैं कि लॉकडाउन के दिनों में भी और उससे वर्षों पहले भी, यही नौकरी पेशा, आपके हिसाब से गुलाम, अपनी नियमित आय से कभी आपके रहने का किराया, कभी आकस्मिक अनश्यकता, कभी खाने के वांदे वाले दिनों में बिना दो बार सोचे पैसे ट्रांसफर करती है। ये विचित्रविर्य किसी न किसी को हमेशा अपने दुर्भाग्य का कारण बनाए फिरते हैं। इनके हिसाब से सबने इनके ऊपर अत्याचार किया और लॉ ऑफ अट्रैक्शन , आकर्षण का सिद्धांत आदि सब खोखले कांसेप्ट हैं अमीरों के चोंचले।

क्या करिएगा समय ही ऐसा है नेकी कर दरिया में कूद।

ऑनलाइन मित्रता में कुछ लोगों का साथ समय आपको वक्सिनेशन की तरह दिलाएगा, ऐसे लोग आपको समझ नहीं आएंगे लेकिन जब वे आपके जीवन से जायेंगे आपकी क्षमता उस तरह के लोगों से बचने के लिए तैयार हो चुकी होगी।

ऑफलाइन या ऑनलाइन मिले ये लोग बेहद फैंसी आदर्श और विचारों वाले होते हैं, चार किताब पढ़ चुके होते हैं लेकिन आगे कुछ नया नहीं पढ़ते। ये आपको प्रभाव में रखते हुए सारा समय आपकी कमी का एहसास दिलाएंगे और बताएंगे कि उनके मिलने से पहले आपको कुछ नहीं आता था। साथ ही आपकी अच्छी जीवन शैली को ढोंग दिखावा बता के हमेशा एक काल्पनिक दुनिया में रखेंगे जहां केवल उनके विचारों से चलने पर आप सफल हो सकते हैं। ऐसे लोग स्वाभाविक रूप से आपसे मानसिक रूप से ज़्यादा मज़बूत होते हैं। इनको मेंटल प्रेडेटर कहते हैं।

ऐसे भी सभ्य स्त्री पुरुष होते है जो
विवाह नहीं करेंगे, परिवार से दूर रहेंगे,
लेकिन रिश्तों से कैसा व्याहार करें
इसकी सलाह भर पेट देंगे।

इनके हिसाब से लिविन में रहती
अपने हिसाब से जीती स्त्री
पूरी तरह बर्बाद है जिसकी आर्थिक स्वतंत्रता
क्लीवेज एवम जननांगों के दमपर है।

इनकी हर बहस स्लट शेमिंग तक बेहद है
ये पढ़े लिखे कोढ़ है, ऐसे सोचने वालों की
पीठ में रीढ़ नहीं, सस्ते नशे की बोतल होती है।

प्रज्ञा मिश्र