Shatdalradio के 23 अक्टूबर वाले #mentzacircle में मिथिलेश पाठक , Sharad Kokas , DrVasudha Mishra और #MENTZA के अन्य आदरणीय अतिथियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम को Mentza aap पर कुल 25 लोगों ने सुना और इसके अलावा वेबसाइट पर सुना गया। अब यह चर्चा #spotify पर उपलब्ध है।

किसी ने अनुमान नहीं लगाया था कि एक दिन कोविड-19 जैसा वायरस आएगा और लोगों की जीवनशैली को बदल देगा। कोविड-19 की वजह से हमारी दुनिया में कई बदलाव आए और सभी को नया नॉर्मल अपनाने में थोड़ा वक्त लगा। इसका प्रभाव हर जगह था, जिसके परिणामस्वरूप स्कूल और अन्य शैक्षणिक संस्थान बंद हो गए।

पुराने ढर्रे पर चल रहे होनहार शिक्षक भी खासा परेशान हुए। भारतीय शिक्षक जो ब्लैकबोर्ड, चाक, किताबें और क्लास रूम शिक्षण के विशेषज्ञ हैं, वे डिजिटल शिक्षण के लिए नए थे, लेकिन उन्होंने फटाक से नए तरीकों को अपनाया और वर्तमान स्थिति में छात्रों की सहायता के लिए खुद को प्रबल किया।

कार्यक्रम के दौरान हमने बात की, कैसे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की शिक्षा को pandemic lockdown ने प्रभावित किया। हमने समझा कि ग्रामीण क्षेत्रों की शिक्षा को गंभीर क्षति हुई है, क्योंकि इंटरनेट और ऑनलाइन पढ़ाई उपलब्ध कराने का संसाधन अपर्याप्त रहा, एक GB data पर एक किलो आटा हावी होता दिखाई दिया।
गरीब घरों में जीवन यापन के आगे पढ़ाई को ताक पर रखने की प्रथा नई नहीं हैं। लेकिन ग्रामीण हलकों में मानसिक रूप से बच्चों का जीवन घूमने टहलने के लिहाज़ से राहत वाला रहा।

शहरी क्षेत्र पढ़ाई के मामले में थोड़ी बेहतर स्थिति में रहे ,उपलब्ध संसाधन पढ़े लिखे मां बाप के कारण पढ़ाई ठीक ठाक जारी रही। परंतु urban poor के लिए और महानगरों के छोटे घर में रह रहे परिवारों के लिए मनोवैज्ञानिक और संसाधन जनित चुनौतियां, ग्रामीण अंचलों से अभी अधिक गंभीर होती दिखाई दीं।

urbanpoor यानी शहरी गरीबी, गरीबी का एक रूप है जो विशेष रूप से बड़े शहरों में दिखाई देती है, जो खराब जीवन परिस्थितियों और आय के साथ-साथ जीवन के एक सभ्य स्तर के लिए आवश्यक उपयोगिताओं की कमी के कारण होती है।

इस सबके मध्य हमने इन आशंकाओं पर चर्चा उठाई कि कुछ बच्चे जो कोविड बैच निर्धारित कर दिए गए हैं वे किस प्रकार के भेद भावों का शिकार हो सकते हैं।
चर्चा में हमने यह चिंता व्यक्त की, कि हमारे बच्चे डिजिटल पढ़ाई के साथ किस तरह की मानसिक मजबूती पा सकेंगे। हस्त लेखन हमारे व्यक्तित्व विकास का एक हिस्सा माना जाता है जिसमें गिरावट आई है।

आगे हमने समझा कि लोकडाउन के दिनों में ऑनलाइन पढ़ाई एक तरह से Disruptive Technology यानी विध्वंसकारी तकनीक की तरह हमारे देश में आई जिसने पढ़ाई के पुराने तरीकों की प्रासंगिकता को कटघरे में ला दिया। Zoom , MS Teams, Google के लाइव प्लेटफार्म हमारी रोजमर्रा का हिस्सा बन गए।

disruptivetechnologies यानी एक विघटनकारी तकनीक वह तकनीक है जो एक स्थापित तकनीक को विस्थापित करती है और पुराने उद्योग और उत्पाद को पूरी तरह अप्रासंगिक कर के नए उद्योग और उत्पाद की मांग और पूर्ति का बाज़ार बनाती है।

जैसे Cloud Storage आने के बाद पेनड्राइव हार्ड ड्राइव आदि अप्रासंगिक होने लगे हैं। वैसे ही ऑनलाइन पढ़ाई उपलब्ध होने के करना दूर दूर यात्रा कर के होने वाले पठन पाठन अप्रासंगिक होने लगे हैं।

अचानक आए पैंडेमिक लॉकडाउन्न ने हमें नए तरीके से सोचने पर बाध्य किया और पठन पाठन ने नए रास्ते हमारे सामने खोल दिए । पढ़ाई लिखाई और ट्रेनिंग के क्षेत्र में नई तरह की जॉब opportunity भी आई तो ये बात वाजिब है कि दुनिया से कदम ताल करते चलने के लिए हमें नए तकनीक के साथ खड़ा रहना होगा ।


लेकिन भारत जैसे देश जिसमें सेंसस के अनुसार पचास प्रतिशत जनता गरीबी रेखा से नीचे जा चुकी है वहां आर्थिक खाई और संसाधन की अनुपलब्धता को कैसे पाटा जाए?


क्या हम अति आधुनिकीकरण और तेज़ी से बढ़ते दौर में गरीब और कम जानकर को हाशिए पर धकेल कर समाज की मुख्य धारा से काटने में हिस्सा ले रहे हैं या वाकई सबके सर्वांगीण विकास का दृश्य नई डिजिटल पढ़ाई लेकर आई है?

आइए चर्चा करें इस कड़ी में

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