कविता – देशहित का आह्वान

जय हिंद के बहुत सारे रंग हैं,
पर सफेद भारी पड़ता है।
क्योंकि सरहद पर रंग वीरता का
आपकी हमारी शांति को
बचाये रखने के लिए
डट कर लड़ता है ,
कभी आतंकवाद से ,
कभी मौसम की मार से।

हमारी मुस्कराहट की हरियाली बरकरार रहे
इसलिए बिछ जाते हैं मुस्तैद हरी वर्दी वाले वीर सैनिक धरती का कवच बन कर तन कर होकर ,
आराध्य दीपक, सांझ पड़ने वाली बाती से।

लौ बुझने न पाए
आम आदमी भी
देशभक्ति में आगे आये
देशभक्ति, भ्र्ष्टाचार को विकल करती है
देशभक्ति देश हित में प्रश्न करती है
खोखले वाचन से कर्ता का मौन-कर्म अच्छा
आह्वान करो और आश्वासन दो
अपने स्तर पर भी हम सभी करते रहें
देश हित में अच्छा।

  • जय हिंद
  • जय जवान
  • जय किसान

गणतंत्र दिवस को सही अर्थों में जीने के लिए भारत की आत्मा में बसे वसुधैव कुटुंबकम् को सर्वोपरी रखना होगा।

प्रज्ञा मिश्र