शतदल

जो मराल मोती खाते हैं, उनको मोती मिलते हैं।

Anchor FM

Kumar Vishwas ji ki shayri शतदल रेडियो

किसी के दिल की मायूसी जहाँ से हो के गुजरी हैं हमारी सारी चालाकी वही पे खो के गुजरी हैं तुम्हारी और हमारी रात में बस फर्क इतना हैं तुम्हारी सो के गुजरी हैं , हमारी रो के गुजरी है अभी चलता हूँ रस्ते को मैं मंजिल मान लू कैसे मसीहा दिल को अपनी जिद का कातिल मन लूँ कैसे तुम्हारी याद के आदिम अँधेरे मुझको घेरे हैं तुम्हारे बिन जो बीते दिन उन्हें दिन मान लू कैसे ग़मों को आबरू अपनी ख़ुशी को गम समझते हैं जिन्हें कोई नहीं समझा उन्हें बस हम समझते हैं कशिश जिन्दा है अपनी चाहतो में जानेजां क्यूंकि हमें तुम कम समझते हो, तुम्हें हम कम समझते हैं मिले हर जख्म को ,मुस्कान से सीना नहीं आया अमरता चाहते थे पर, जहर पीना नहीं आया तुम्हारी और मेरी दास्ताँ में फर्क इतना हैं मुझे मरना नहीं आया तुम्हे जीना नहीं आया ये तेरी बेरुखी की हमपे आदत खास टूटेगी कोई दरिया न ये समझे की मेरी प्यास टूटेगी तेरे वादे का तू जाने मेरा वो ही इरादा है की जिस दिन सांस टूटेगी उसी दिन आस टूटेगी
  1. Kumar Vishwas ji ki shayri
  2. कविता – पीड़ा के बादल
  3. "पिता" शब्द एक भावना है
  4. तलाश – मई 2019 में लिखी एक कविता
  5. अमीर खुसरो की मुकरियाँ
%d bloggers like this: