शारदामणि

भाई गंधर्व झा से कल पुष्टि हुई की मणि सिरीज़ में मणिकांत अंकल की अब तक 26 किताबें लगभग आ चुकी हैं। मैथिली भाषा की ऐसी-ऐसी विभोर करने वाली रचनाएँ जैसे काली मैया मनपूरन भाई को खुद बोल-बोल लिखाती हों और सरस्वती गणेश स्वयं उनके लेखन का निरीक्षण करने आते हों। अंकल ये सब नहीं बताते पर हमें तो पता है। उनका घर ही मंदिर है। ये कोई राज़ की बात थोड़ी है। सुंदर पावन स्थल की माया है। मणि रचना और से मोह स्वत: जुड़ता है।

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