देशभक्ति नहीं है यह

देशभक्ति की आड़ में रोज़गार/बेरोज़गार युवा पुरूष एवं महिला ऑनलाइन टाइम-पास करने की बजाय और कुछ नहीं कर रहे ।

जो भारतीय चुप चाप अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी को ईमानदारी से निभा रहे हैं वही देश की प्रगति में हिस्सेदारी दे रहे हैं।

अगर भारत में ऐसी स्थिति है कि लोग हँस बोल के रचनात्मक और पारिवारिक आम जीवन व्यतीत कर रहे हैं तो यह सुख और सैनिक सफलता की बात है। यह वाकई ज़रूरी नहीं की डिस्पले पिक बदलना , कैंडल मार्च करना और शोकाकुल रहना ही देशभक्ति होगी।

जब देश व्यथित हो उस समय भी अगर आपके पास अपने बच्चे को कहानियाँ सुनाने उसके साथ नाचने गाने का दिल है तो भी आप देशभक्त है क्योंकि आप भविष्य में एक सन्तुलित नागरिक देने की प्रकिया में हैं। अपना कर्म, रोजमर्रा का जीवन, घर के बच्चे व ज़िम्मेदरियों को धकेल के ऑनलाइन गुबार निकालने से देशभक्ति तो साबित नहीं ही होगी , साथ ही देश के देश के भविष्य में भी रोड़ा बनेंगे ऐसे भारतीय ।

आज कितना सुसुप्त भारत है। अधिकतर युवा ओनलाइन टुटपूंजिये हो कर रह गए हैं।

यही आज के भारत को खोखला कर रहा है। कितना बड़ा जन समूह केवल गलत भाषा प्रयोग करने में अपनी ऊर्जा क्षीण कर रहा है।

आज शहादत हुई है

बयालीस सुंदर और प्यारे परिवार
लूट लिए अलगाव वादियों ने,
एकदेश के नाम
आज शहादत हुई है।

घाटी में आज फिर
नया आँकड़ा पार हुआ है
आज शहादत हुई है।

चैनल वाले
सबसे पहले, सबसे पहले
हाँक रहै हैं बाँट रहे हैं दृश्य
विचलित करेंगे ये चित्र की वार्निंग साट कर
क्योंकि आज शहादत हुई है।

चीथड़ों की तस्वीर,
देशभक्ति के नाम पर
नमन और दुखद क्रॉप कर
साझा हो गयी
दिखाओ-दिखाओ ,
देखो बस हाथ दिख रहा है
ओहो ज़रा मुझे भी बताओ
मीडिया को अब आदत हुई है
आज शहादत हुई है।

उम्मीद है एक और शहादत काम आए
कभी तो मौत के सौदागर घाटे में जाएं!

जिन्हें फर्क पड़ गया
वे सिसक के जीते रहेंगे
जो कुछ कर सकते हैं
वे दिनों दिन तर्क करेंगे।
कौन जाने कौन है
और क्या बात दफन करेंगे
घाटी में कफ़न करेंगे।

होगा रुट कॉज़ एनालिसिस
फाइलों में दर्ज होंगे तथ्य
चोरी होगी आग लगेगी
कुछ नामों के निकल जाने पर
स्टेक्स बहुत हाई हैं
पर फिर आज शहादत हुई है।

बहुत जानें जाएंगी,
कुछ इतिहास ज़िम्मेदार कहलायेगा,
कुछ सरकारें राजनीति कर जाएंगी
थोड़ा बढ़ रहा है ,
गहरा रहा है
अंधेरा
घड़ी में तीन बजे हैं,
पता नहीं
घाटी की सुबह कब आएगी!

देश के वीर जवानों की शहादत को मैं इन शब्दों से नमन करती हूँ। फ्लाइट प्रैक्टिस में मरते जवान, यात्रा करते मरते जवान , घटिया उपकरण के चलते मरते जवान, बचाव कार्य में मरते जवान। ये फौलाद की दीवार बहुत मुश्किल तैयार होती है। इसे यूँ ही नहीं गिरने देना चाहिए।
संसाधन का सही उपयोग सही जगह होना चाहिए । जिनके जीने से फर्क नहीं पड़ रहा वो जेड सेक्युरिटी में बुलेट प्रूफ में हैं और जिनके कारण पूरा देश अपनी होली दीवाली मना रहा है उनकी दूसरी सबह का ठिकाना नहीं।

विचार मेरे अपने हैं किसी से प्रभावित या सलाह मशविरा कर के नहीं लिखे गए।

#प्रज्ञा 14 फरवरी 2019
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