दादी माँ की याद में -12 जनवरी की डायरी

छोटे पापा आज वाट्सप पर लगभग खज़ाना शेयर किए हैं 🌹

ये 2005 की तस्वीर है।हम तब खालसा कॉलेज दिल्ली विश्विद्यालय, केमिस्ट्री ऑनर्स सेकंड ईयर में एडमिशन लेकर घर आये थे। सभी लोग उस समय पूर्णियाँ में जुटे थे, और जैसा की बड़े पापा की हमेशा आदत रही है वो आखिर दिन में ग्रुप फ़ोटो करते हैं। तो हम सब उसी लिए छोटा छत पर इकट्ठा हुए थे। …

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कुमार विश्वास जी के लिए सप्रेम सन्देश

कुमार विश्वास जी पसंद हैं। काव्य विधा में महारथी हैं।अच्छे वक्ता हैं, ओज पूर्ण भाषण देते हैं, मस्त से भीड़ को जोश से भर देते हैं। उनसे मंचीय कविता पाठ सीखना चाहिए, मंच संचालन सीखना चाहिए, हिंदी भाषा से व्यवसायीकरण और पैसा बनाने का हुनर सीखना चाहिए, जैसे वे हरिवंश राय के कदमों पर चले हमें भी चलना चहिए।

लेकिन लेकिन लेकिन …

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दिल्ली पुलिस दिल्ली सरकार के अधीन होनी चाहिए

Delhi Police को दिल्ली सरकार के अंदर लाने की माँग कड़ी से कड़ी होनी चाहिए। मौजूदा सरकारी तंत्र हिंदुत्व के गुंडों(ABVP) , (RSS के लठैतों) को संरक्षण देता है और जनता का भरोसा मौजूदा नेतृत्व से खत्म हो रहा है।

मुट्ठी भर प्यादे देश मे डंडा लेकर मार्च करेंगे और भारतीय डर जाएगा यही समझ कर दमन चक्र चालू है। शर्मनाक है कि गाँधी की धरती पर गंदी गाली गलौज की भाषा इतनी व्यापक हो गयी।

वो लोग जिनमे माद्दा ही नहीं JNU जैसी संस्था की परीक्षा पास कर वहाँ पढ़ने का वे इसे बंद करा देना चाहते हैं। ये ही लोग आज हँस रहे हैं । जो हँस रहे हैं वे के कमज़ोर हैं, कायर हैं, उन्होंने जीवन में कुछ हासिल नहीं किया , वे अकर्मण्य रहे और दूसरों पर अपनी असफलताओं ठीकरा फोड़ते रहे हैं। इन लोगों को आज खुले आम छाती पीट कर गुंडई करने का प्रमाण पत्र मिला है कि जाओ रे मार दो हर उस आज़ाद ख़्याल सोच को जो अलग सोचता है।

Opindia जैसे वेबसाइट गलत पत्रकारिता कर रहे हैं। वे एक विशेष धर्म को मानसिक रूप से चोट पहुंचाने की भाषा मे जान बूझ कर घटिया हेडलाइन बनाते हैं।

भारत के प्रधानमंत्री Paytm के ब्रांड अम्बेसडर बनते हैं, बाद , महंगा सूट , महंगा चश्मा का उस परिस्थिति मे प्रदर्शन करते हैं जब उनके ही देश का भविष्य सड़कों पर अपनी वैचारिक स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ रहा है।

अमित शाह और योगी बदले के स्वर में बात करते हैं, कपड़ों से पहचान का घटिया बयान आता है। हिंदुत्वा के गुंडे औरतों से केवल गाली गलौच धमकी वाली भाषा में बात करते हैं। त्रस्त के रख दिया है पूरे देश के आम नागरिक को।

नागार्जुन जी की शासन की बंदूक कविता याद आयी साथ ही याद आयी इंदिरा जी पर लिखे उनके कटाक्ष जिसका प्रयोग एक मित्र ने रचनात्मक ढंग से किया है। नीचे पढ़ सकते हैं-

एक मित्र की फेसबुक वॉल से सहेज कर

मोदीजी क्या हुआ आपको..?
(नागार्जुन की कविता नए कलेवर में)
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मोदीजी, मोदीजी, क्या हुआ आपको?
आरएसएस को तार दिया, बोर दिया बाप(जनता) को!
क्या हुआ आपको?
क्या हुआ आपको?

आपकी चाल-ढाल देख- देख लोग हैं दंग
हूकूमती नशे का वाह-वाह कैसा चढ़ा रंग
सच-सच बताओ भी
क्या हुआ आपको

छात्रों के लहू का चस्का लगा आपको
काले चिकने माल का मस्का लगा आपको
किसी ने टोका तो ठस्का लगा आपको
अन्ट-शन्ट बक रहे जनून में
शासन का नशा घुला खून में
फूल से भी हल्का
समझ लिया आपने हत्या के पाप को
मोदीजी, क्या हुआ आपको

सुन रहे गिन रहे
एक-एक टाप को
हिटलर के घोड़े की, हिटलर के घोड़े की
एक-एक टाप को…
छात्रों के खून का नशा चढ़ा आपको
यही हुआ आपको
यही हुआ आपको

#StandWithJNU
#RejectNRC_NPR
#BoycottCAA

कुलदीप प्रसाद जी के विचार आप उनकी प्रोफाइल लिंक पर पढ़ सकते हैं।

तस्वीर साभार : कुलदीप प्रसाद

चलिये गणतंत्र की ओर.. जय हिंद!

मेरा देश गणतंत्र दिवस की ओर अग्रसर है, भला हो मोदी जी का बच्चा बच्चा इसको इस साल सार्थक करेगा तिरंगे के साथ न की भगवा झंडे के साथ।

देश को धर्म से ऊंचा रखने से ही वैज्ञानिक सोच का आगमन होता है। जिस धर्म से अध्यात्म नहीं जन्म लेता वह धर्म अपने मूल स्वरूप को खो रहा होता है। यदि कोई भी धर्म हिंसा पर उतारू करे उसमे बदलाव की आवश्यकता समझी जानी चाहिए।

अगर मेरे देश की सरकार किसी एक धर्म की पैरोकार लगने लगे तो जनता को उठ खड़ा होना चाहिए।

यह जन तंत्र है। हमने देखा है धर्म के आधार पर बने सभी देशों में मौलीक अधिकारों का हनन आम बात है। स्त्री का दलित हो जाना आम बात है।

हाल के पूरे प्रकरण में देखिए कितनी अच्छी बात हुई। सुसप्त ज्वालामुखी धधका है

वे युवा जो सकूँ की ज़िन्दगियों में, वीडियो गेम में पड़े, ” व्हाट यार, चिल ब्रो लेट्स हव सम फन, इट्स हॉलिडे टुडे” किया करते थे वे जाग कर संविधान पर पहरा देने लगे हैं । मोदी जी का आभारी रहेगा भारत।

भारत का कोई और प्रधानमंत्री हमारे अंदर लग चुकी जंग एक झटके में नहीं छुड़ा पाया था आखिर।

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नव वर्ष 2020 का मंगल पदार्पण

प्रतिवर्ष नए साल का आगमन अब बड़ी ननद सुषमा दीदी के ससुराल वालों के साथ ही मनाने की आदत हो गयी है।

विवाहोपरांत मुम्बई में बसने के बाद सोसायटी में ही मध्य रात्रि तक डिस्कोथेक और फ़ास्ट बॉलीवूड नम्बर पर बेजान होने तक झूमते रहे थे, मेरा दिल आज भी ऐसी रातों में बसता है, पंजाबी और इंडी पॉप धुनों पर मेरे पैर मेरे नहीं रहते और कोशिकाएं शरीर के अंदर से धक्का देने लगतीं है कि शुरू हो जायें मोहतरमा । ख़ैर कभी-कभी यूँ भी हुआ है कि बस टीवी देखा, बाहर से खाना आर्डर किया और देर रात प्रोग्राम देख सो गए।

वर्ष 2014 के बाद से करीब दो तीन साल ऐसा संजोग हुआ की मेरे जेठ जी नए साल पर एक जनवरी को जन्म दिन अपने माँ बाऊ जी के आशीर्वाद में हनुमत आराधना के साथ मनाने की इच्छा से मुम्बई आते रहे।

2014 से 2016 के दौरान ख़ूबसूरत याद सजायी हमने, मैंने और आलोक ने ये दिन हमारे बड़े सुपुत्र अभिज्ञान के सौभाग्य से अर्जे हैं ।मेरी सास एक बेहद सक्षम महिला हैं वे निर्भर रहना और कुशहर के समाज से कटे रहना बिल्कुल पसंद नहीं करतीं , फिर भी पोते की अच्छी परवरिश के लिए लगातार छ: वर्ष मुम्बई में रहीं थी, अभिज्ञान भी हमेशा आर्द्र नेत्र रखते हैं दादी के लिए, उनसे बात करते ही गला रुंधता है उनका। सास ससुर के सान्निध्य का असर ये हुआ की परिवारिक मेल मिलाप वाले आयोजन अधिक होते रहे।

मलाड रह रहीं ननद के यहाँ से बुलावा भी अब हर साल आने लगा उनके पारिवारिक गेट टुगेदर में मैं आलोक मम्मी जी बाबू जी शामिल होने लगे। परिवारिक आयोजन की तरह मनाया नया साल सभी उम्र के लोगों के आनंद का समावेश कर लेता है। अब समय जाते मैं भी इसमें रम गयी हूँ। हम सभी सत्तर प्रतिशत जल होते हैं, घुल जाते हैं।

दो बार हमने रिंकू जी के डांस स्टूडियो में सेलिब्रेट किया था शायद 2015 और 2016 में , उनकी वाइफ आस्था, अच्छे पार्टी गेम्स करा लेती हैं। मैं और आलोक, ठाकुर विलेज स्थित द फ्रेंच-कनेक्शन शॉप से न्यू ईयर केक ले जाते रहे हैं, पहले अपनी पसंद का पाइनएप्पल फ्रेश फ्रूट ही ले जाते थे । अब बच्चों की पसंद का चोको ट्रफल वगैरह ले जाते हैं।

भारतीय परिवार एक सुरक्षा कवच होते हैं जिसमें सक्षम युवा के किले की परकोटों में बुज़ुर्ग और बच्चे देखभाल के साथ आनंद पूर्वक बने रहते हैं और फलते फूलते हैं ।

मुंबई की विरासत में अपने बच्चों के लिए हम खेत नहीं छोड़ के जा सकते, उनके लिए रिश्तों की एक क्यारी तैयार कर के जाना श्रयस्कर है।

तस्वीर में बाएं से दाएं –रिंकू जी की दादी, रिंकू जी की मम्मी, आस्था, मोना, कौशिक,मिक्कू, पुनिता दीदी,नीलम दीदी,सुषमा दीदी, आराधना, अजय जीजा जी,अवधेश जीजा जी,प्रमोद जीजा जी, रेयान, मैं, आलोक, अंशू, अमरनाथ झा अंकल,मोनू सत्येंद्र मिश्र जीजा जी।