नींद

नींद सुखद अवस्था है,अपने आप से प्यार करते हैं वे जो लेते हैं अच्छी नींद। शरीर के तंत्र सभी लाइन पे लाती है रोज़ पूरी होती नींद। बहुत ज़रूरी नींद।

सपनो की दुनिया है नींद, सपने होंगे पूरे जब देखे जाएंगे, खुली आँखों की जलन और सूखता कॉर्निया सबसे निजात है नींद, नहीं आते सपने आराम कुर्सी पर, हमें सर के नीचे हाथ रख कर लेटे रहना है, लम्बे होकर बिस्तर पर पसार टाँगें। बेहद आराम की तलब के साथ देखने हैं अपने सपने। सपनों के बीज बोती नींद।

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इन्नर – विभूति भूषण झा सम्पादित दूसरा साझा संकलन

इन्नर साहित्यिक सँग्रह में मेरी भी दो कविताएँ स्थान बना पायीं ये मेरी साहित्यिक यात्रा के में नई उपलब्धि है।

अक्टूबर 2019 के दौरान फेसबुक पर ही  मुकेश सिन्हा जी के माध्यम से  Bibhuti B Jha जी और उनकी साहित्यिक गतिविधियों से परिचय हुआ।

अवली साझा साहित्यिक सँग्रह के बाद इन्नर के छपने की विस्तृत जानकारी इन्होंने बढ़ियाँ तरीके से अपनी वाल और वाट्सप समूहों के माध्यम से बताई थी।

दी गयी जानकारी से यह महसूस हुआ की यहाँ  रचनाएँ सेलेक्ट हुई तो बड़ी बात होगी। बिभूति भाई साब जिस पैशन के साथ बच्चों को बड़ा करने जैसे “अवली” लाये और अब “इन्नर” का संपादन कर का रहे हैं उससे सहज प्रभावित होना स्वाभाविक है।

अवली साझा साहित्यिक सँग्रह खरीदने के लिए यहाँ क्लिक करें। बेहतरीन किताब है इसके कवर की भी अपनी अलग कहानी है। रुचिकर होगा किताब खरीदकर ही अवली के बारे में जानना।

अमेज़न पर उपलब्ध जानकारी के हिसाब से अवली पुस्तक पूरे भारत के 35 लेखक कवि और शायर की रचनाओं का संग्रह है. एक कम्प्लीट साहित्यिक पैकेज है. 216 पेज की पुस्तक है और सभी उम्र के लोगों के लिए है।

बिभूति जी के शब्दों में –


“अवली” के बाद लोगों को भरोसा हुआ कि बिना पैसे दिये भी रचनाएँ छपती हैं। लेखकीय प्रति दी जाती हैं।”

इन्नर किताब के लिए भी उनका कहना है कि सबों के सहयोग से एक अच्छी पुस्तक आ रही है।

111 रचनाकार में अगर 41 अगर बहुत लिखने वाले लोग हैं तो 70 नये लोग हैं। यही 70 उनकी उपलब्धि है।
सामान्य साझा संकलन की तरह “इन्नर” को मैं दम तोड़ने नहीं दूँगा। दो मित्र निःस्वार्थ भाव से पुस्तक का प्रचार सामग्री जुटाने में लगे हैं।”

सम्पादन की मेहनत से इतर वे समय-समय पर रचनाकारों से कनेक्ट बना कर रखना नहीं भूले। कभी वाट्सप , तो कभी फेसबुक से लगातार किताब का स्टेटस खुद ही बताते रहे।

मैंने छः नवम्बर को रचनाएँ ईमेल के माध्यम से भेजी। बारह नवंबर तक एक्नॉलेजमेंट आ गयी।

बाइस दिसम्बर को दूसरी सूची जारी हुई उसमें मेरा नाम था।

इकतीस दिसम्बर को खेद ब्रॉडकास्ट जारी हुआ। मैसेज आया की गुवाहाटी में कर्फ्यू और इंटरनेट बन्द होने के कारण विलम्ब हुआ था अन्यथा यह किताब 31 दिसम्बर तक आने की प्लानिंग थी। परन्तु संवाद को सुखांत रखने के लिये उसमें चयनीत होने की बधाई भी थी। यह तरीका लुभावना और सीखने योग्य है।

शुभ संध्या।
मेरा प्रयास था कि “इन्नर” पुस्तक 31 तक आ जाये लेकिन कर्फ्यू और इंटरनेट बन्द होने के कारण विलम्ब हुआ। प्रयास है कि जल्द से जल्द आ जाये।
आपकी रचना का चुनाव हुआ है।
आज इसकी ही बधाई स्वीकारें।
हर कदम की सूचना दी जायेगी। किन रचनाओं का चुनाव हुए है वो भी सूचित करुँगा।
आपका
विभूति।

चार जनवरी के बाद जब  क्षेत्र में स्थति सामान्य हुई तब कवर पेज फाइनल करने पर ज़ोर दिया गया। उन्होंने सभी मित्रों को इस चयन प्रक्रिया में शामिल किया, राय ली और करीब एक महीने की खोज बीन ब्रेनस्ट्रोर्मिंग के उपरांत यह बढ़ियाँ कवर पेज नीचे फाइनल होकर सबके सामने अवस्थित है। इसे Red Design नाम की एजेंसी ने डिज़ाइन किया है, बेहतरीन काम। सापेक्षिक । विषय के अनुरूप और मर्म स्पर्शी।

Red Design से आप यहाँ क्लिक कर सम्पर्क कर सकते हैं।

अब तो बस किताब के आने भर की देर है और प्रतीक्षा भरपूर है।

मेरा ख़्याल है इस पूरे चक्र में सबसे ज़्यादा जो बात हमने सीखी वह है इन्नर शब्द का अर्थ।

सम्पादक महोदय इतनी विनम्रता से लगभग हर नए व्यक्ति को इसका अर्थ बताते हैं कि याद होकर ही रहता है तो लीजिये आप भी जान लीजिए :

इन्नर – संज्ञा पुलिंग [संस्कृत अनीर=बिना जल का] पेउस (1० दिन के भीतर ब्याई हुई गाय का दूध) में गुड़, सोंठ चिरौंजी और कच्चा दूध मिलाकर पकाने से वह जम जाता है । इसी जमे हुए दूध को इन्नर कहते हैं ।

भला हो इस पूरे प्रसंग का जो मुझे इस जमे दूध का नाम तो पता चला। मुंबई में बोरीवली स्टेशन से लेकर कांदीवली तक ठेले पर लाल रेक्सीन के ऊपर पनीर सी दिखने वाली कितनी बिकती है ये।

मज़े की बात बताऊँ तो मेरे पति आलोक का यह सबसे पसंदीदा पकवान है पर शादी के बाद फिर वे अब तक न खा पाए हैं, इसकी भी बड़ी रुचिकर कहानी है। एक बार हमारी कोर्टशिप के दौरान हुई भेट में उन्होंने मुझे यह मंगवा के खिलाया और मैं भी इस डिश का कांसेप्ट ही डाइजेस्ट नहीं कर पायी । डिश तो दूर की बात है ।

अच्छी भली एक भारतीय मिठाई उसके बाद आलोक फिर कभी न ला पाए , पंगा ही क्यों लेना।

लेकिन इस किताब के कवर की देसी मिठास , इन्नर शब्द को बार बार सुनने की प्रक्रिया ने मुझे वो स्वाद समझा दिया है जो मुझे अच्छा तो लगा था पर  लिए हामी भरने की समझ तब मुझमें ही नहीं थी।

कितना कौतूहल था उस क्षण में जब आलोक को लगा था की वो मुझे कुछ नई कुछ अनोखी चीज़ से परिचय कराने जा रहे जो मैंने कभी न देखी न सुनी होगी।

“अरे ये पनीर है।”
“खा के तो देखो।”
“हम्म मीठा है”
“क्या है पता है? “
…….

नहीं, तब नहीं मालूम था, और तो और कोई राय न होने के बावजूद मन रख लेने का हुनर भी नहीं पता था।

भला हो सहनशील भारतीय पतियों का , उनके हिस्से भी अच्छा खासा इंतज़ार होता है, मुझे दस वर्ष होने के बाद इन्नर की खूबसूरती का आभास हुआ है।

किताब इन्नर छप कर हाथ में आएगी तो पतिदेव के साथ मुम्बई में इन्नर खा के सेलिब्रेट किया जाएगा।

बिभूति भूषण जा जी को धन्यवाद किताब में स्थान देने के लिए और  सुंदर कहानी का पन्ना मेरी ब्लॉग में जोड़ देने के लिए।

इन्नर साझा साहित्यिक संकलन

मानस रिवाइज्ड

हिंदी साहित्य के इतिहास में भक्तिकाल को 1350 ई. से 1650 ई. के मध्य माना गया है। यह हिंदी साहित्य का स्वर्ण युग कहलाता है।

इसमें तुलसी सूर जायसी तथा कबीर जैसे महान कवियों ने अपनी रचनाओं से समाज को नई दिशा प्रदान की।

गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित रामचरितमानस, भक्ति काल में सगुण काव्यधारा का सबसे प्रसिद्ध प्रबंध काव्य ग्रंथ है। गोस्वामी तुलसीदास समग्र मानवता के कवि माने जाते हैं। रामचरित मानस में तुलसीदास जी ने भारतीय संस्कृति का एक आदर्श स्वरूप प्रस्तुत किया है। तुलसीदास जी ने अपनी उच्चतम स्तर की प्रतिभा दर्शायी है और महाकवि एवं लोकनायक होने का प्रमाण दिया है। वे समग्र मानवता के कवि हैं।

हिंदी साहित्य में रामचरितमानस जैसा लोकप्रिय और श्रेष्ठ महाकाव्य दूसरा कोई नहीं है।मानस सर्वकालिक प्रासंगिक महाकाव्य है। यह रामभक्ति काव्यधारा में रचित भारतीय संस्कृति का एक आदर्श स्वरूप है।

तुलसीदास, भक्ति को किसी साम्प्रदायिक भाव में बंधे बिना सरल आचरण का पर्याय बताते हैं, तुलसी की दृष्टि से भक्ति मानव जीवन का सार है और विषयों का भोग मात्र इस जीवन का उद्देश्य नहीं होना चाहिए।

मनसा वाचा कर्मणा

काव्यशास्त्र और मानदंड की दृष्टि से रामचरितमानस ग्रंथ में निम्नलिखित चारों विशेषताएं हैं – 

  • उदात्त चरित्र निर्माण ग्रंथ
  • धर्मग्रंथ
  • संस्कारग्रंथ
  • स्मृतिग्रंथ

 

मानस ऐसा धार्मिक ग्रंथ है जिसे पर्णकुटी से लेकर महलों तक पूज्य ग्रंथ की तरह नियमित पढ़ा जाता है।मंदिरों में , घरों में 24 घंटे का पाठ रखा जाता है।

मानस में प्रतिदिन जीवन के लिए सुक्तियाँ मिलती हैं। मनोहारी सार्वभौम दर्शन मिलता है। 

रामचरित मानस विश्व साहित्य के प्रसिद्ध साहित्यिक रचनाओं में माना जाता है। मानस प्रबंध काव्य में मानव मूल्य के विकास का प्रयास , शील और सौंदर्य का संगम मिलता है।

अनेक पुराणों, वेदों, शास्त्रों के आधार पर मानस स्मृतिग्रंथ की रचना हुई है।

यद्दपि तुलसीदास कहते हैं कि मानस की रचना उन्होंने “स्वान्तः सुखाय” अर्थात केवल अपने अंत: सुख के लिए की वह ऐसा न रह के सर्व सुखाय में परिवर्तित हो गया।

मानस में तुलसीदस का मानना है , की मनुष्य जन्म बहुत दुर्लभ है इसलिए इसे व्यर्थ के संचय में नहीं व्यतीत करना चाहिए। वे कहते हैं:

“सब तज हरि भज”

मानस का संदेश विश्वरूप से आत्मरूप हो जाता है और आत्मकल्याण से विश्वकल्याण में परिणत हो जाता है। 

जैसे हिमालय स्थित मानसरोवर की जाहनवी, मंदाकिनी, भागीरथी अलकनंदा मिलकर गंगा को जन्म देती है और चराचर को पोषित करती हैं, उसी प्रकार वेद, पुराण, दर्शन और धर्म मानस को जन्म देते हैं। 

मानस मनुष्य मन की संवेदना और अनुभूतियों का समृद्ध विश्वकोश है। 

यह मुख्य रूप से संवाद के रूप में चार श्रोता और चार वक्ताओं में विभाजित है।

शिव पार्वती संवाद – शैव और शाक्त जिज्ञासा समाधान

काक भुशूंडि और गरुड़ संवाद – भक्त और वैष्णव का संवाद

याज्ञवल्क्य और भारद्वाज संवाद – ऋषि -मुनि के मध्य का संवाद

कवि तुलसीदास और पाठक का संवाद – सार्वभौम संवाद

यह रूपक सम्पन्न उल्लेख चार मनोहारी घाट की कल्पना के जैसे किया गया है ।

सुभग नगर घाट मनोहर चारि

मिश्र बंधु के मुताबिक

चार मनोहर घाट की कल्पना इस प्रकार समझी जा सकती है’:

  • ज्ञान घाट 
  • कर्म घाट
  • उपासना घाट
  • दैन्य घाट

ज्ञान, कर्म, योग, भक्ति ईश्वर को पाने के मार्ग हैं।

  • शिव -ज्ञान का उपदेश देते हैं। 
  • याज्ञवल्क्य – कर्म का उपदेश देते हैं ।
  • काक भुशूंडि- योग का उपदेश देते हैं।
  • तुलसी -पाठक को ज्ञान कर्म योग से समन्वित भक्ति से रूबरू करते हैं। दिव्य, शील या चरित्र का पाठ देते हैं।

ज्ञान, कर्म, योग से समन्वित भक्ति ही समग्र जीवन का दर्शन हो सकती है

वैचारिक स्तर पर:

  • ज्ञान रहित भक्ति- कोरी भावुकता है ।
  • योग रहित भक्ति- सार रहित विवशता है।
  • कर्म रहित भक्ति – परोपजीवी निरीहता है।

मानस ने सदाचार को बहुत महत्व दिया है। यह पूर्ण जीवन की अशेष गाथा है।

आचार: परमो धर्म:। 

मानस आज और युग सापेक्ष हो चला है क्योंकि तुलसी दास की भक्ति मर्यादित भक्ति है जिसका सर्वथा ह्रास समाज मे सब तरफ व्याप्त है। मानस के मुताबिक भक्ति, मानव जीवन जीने का एक तरीका मात्र ही है उसे अंध विश्वास में नहीं परिणत करना चाहिए।

सन्दर्भ:

  • MhD1 – तुलसी दास और चरितमानस Youtube Lectures on Consortium of Educational Communication,New Delhi—- लिंक यहां।
  • हिंदी साहित्य का इतिहास – राम चंद्र शुक्ल
  • इग्नोउ पाठ्यक्रम के आधार पर

Corona Virus

Virus अकोशिकीय(Acellular ) अतिसूक्ष्म (टाइनी) जीव हैं जो केवल जीवित कोशिका में ही वंश वृद्धि कर सकते हैं। ये नाभिकीय अम्ल और प्रोटीन (DNA) से मिलकर गठित होते हैं, शरीर के बाहर तो ये मृत-समान होते हैं परंतु शरीर के अंदर जीवित हो जाते हैं।

Corona (COV) वायरस का एक बड़ा परिवार है। 

CoV के कारण सामान्य सर्दी से लेकर गंभीर बीमारियाँ तक हो जाती हैं जैसे :

  • मध्य पूर्व के देशों से आया जैसे Middle East रेस्पिरेटरी सिंड्रोम (MERS-CoV) 
  • Severe Acute रेस्पिरेटरी सिंड्रोम (SARS-CoV)

SARS, साल 2002 में चीन में उपद्रव मचा कर गया था और कुछ महीनों के भीतर दुनिया भर में फैल गया, हालांकि यह तेज़ी से नियंत्रित हुआ था। सार्स एक वायरस है जो बूंदों के माध्यम से प्रसारित होता है जो हवा में प्रवेश करता है जब कोई व्यक्ति खांसी, छींक या बातचीत करता है। 2004 से सार्स का कोई ज्ञात संचरण नहीं हुआ है।

Novel कोरोनावायरस (nCoV) एक नई स्ट्रेंड है जो दिसम्बर 2019 पहले मनुष्यों में पहचाना नहीं गया है।

Coronavirus ज़ूनोटिक हैं, जिसका अर्थ है कि वे जानवरों और मनुष्यों के बीच संचारित(transmit) होने वाले वायरस। 
जूनोटिक रोग बैक्टीरिया या वायरस के कारण होने वाला एक संक्रामक रोग है जो जानवरों ,आमतौर पर कशेरुक(vertebrae) और मनुष्यों के बीच फैलता है। इबोला वायरस रोग जैसी आधुनिक बीमारियाँ ज़ूनोस हैं।

विस्तृत जांच में पाया गया कि SARS-CoV मनुष्यों में Civet बिल्लियों से आया और MERS-CoV सोमाली ऊंटों से स्थानांतरित हुआ । 

देखा जाए तो कई ज्ञात Coronavirus जानवरों में पाए जाते हैं जिन्होंने अभी तक मनुष्यों को संक्रमित नहीं किया है।

New Corona वायरस इतना खतरनाक है कि इससे अब तक चीन में लगभग 4515 लोग संक्रमित हो चुके हैं, और 106 लोगों की जान चली गई। संदिग्ध मामलों की बात करें तो उसकी संख्या 6973 है। अब यही वायरस पूरी दुनिया में फैलने लगा है।

NCoV से प्रभावित देश:चीन, ऑस्ट्रेलिया, कंबोडिया, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, जापान, मलेशिया, नेपाल, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया, श्रीलंका, ताइवान, थाईलैंड, संयुक्त राज्य अमेरिका और वियतनाम।

मध्य चीन के हुबेई प्रांत की विशाल राजधानी वुहान, यांग्त्ज़ी और हान नदियों द्वारा विभाजित एक वाणिज्यिक केंद्र है।

Novel (नया) कोरोनावायरस (nCOV)  सांस की बीमारी का प्रकोप पैदा कर रहा है जो चीन के हुबेई प्रांत के वुहान शहर में शुरू हुआ। यह प्रकोप दिसंबर 2019 की शुरुआत में शुरू हुआ और अभी भी जारी है। प्रारंभ में, कुछ रोगियों को वुहान साउथ चाइना सीफूड सिटी (दक्षिण चीन सीफूड होलसेल मार्केट और हुआ नान सीफूड मार्केट ) से जोड़ा गया था।

भारत ने चीन के हुबेई प्रांत में कोरोनोवायरस प्रकोप से उत्पन्न स्थिति के मध्य प्रभावित इलाकों से अपने नागरिकों की निकासी के लिए तैयारी शुरू कर दी है। DGCA से एयर इंडिया को पहली उड़ान की अनुमति मिलने के साथ ही, भारत में चीनी के राजदूत सन वेइदोंग ने बयान जारी किया है की भारत को विश्व स्वास्थ संगठन पर भरोसा रखना चाहिए और जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए।

बीमारी के संकेत

संक्रमण के सामान्य संकेतों में श्वसन संबंधी लक्षण, बुखार, खांसी, सांस लेने में तकलीफ और सांस लेने में कठिनाई शामिल हैं। अधिक गंभीर मामलों में, संक्रमण से निमोनिया, गंभीर तीव्र श्वसन सिंड्रोम, गुर्दे की विफलता और यहां तक ​​कि मृत्यु भी हो सकती है।

संक्रमण को रोकने के लिए मानक निर्देशों में नियमित रूप से हाथ धोना, खाँसने और छींकने पर मुंह और नाक को ढंकना, मांस और अंडे को अच्छी तरह से पकाना शामिल है। खांसी और छींकने जैसी सांस की बीमारी के लक्षण दिखाने वाले किसी के भी निकट संपर्क से बचना चाहिए।

भारतीय नागर विमानन मंत्रालय ने देश भर में सात हवाई अड्डों – दिल्ली, मुंबई, कोलकाता,चेन्नई, बेंगलुरु, हैदराबाद और कोचीन – को स्क्रीनिंग की व्यवस्था करने का निर्देश दिया है।

चीन से आने वाले यात्रियों की स्क्रीनिंग और स्व-घोषणा औपचारिकताएं (self -declaration formalities) जारी है।

भारत भर किसी भी प्रश्न और समर्थन के लिए अखिल भारतीय कोरोनावायरस हॉटलाइन की घोषणा की गई है: + 91-11-23978046।

बचाव के उपाय

  • बीमार लोगों के संपर्क से बचना ज़रूरी
  • वयस्कों और अंतर्निहित स्वास्थ्य मुद्दों वाले यात्रियों को अधिक गंभीर बीमारी का खतरा हो सकता है।
  • जानवरों (जीवित या मृत), जानवरों के बाजारों, और उत्पादों से बचें जो जानवरों से आते हैं (जैसे कि बिना पका हुआ मांस)।
  • कम से कम 20 सेकंड के लिए हाथों को अक्सर साबुन और पानी से धोने की सलाह है। यदि साबुन और पानी उपलब्ध न हो तो अल्कोहल-आधारित हैंड सेनिटाइज़र का उपयोग किया जा सकता है।

लंदन स्कूल ऑफ़ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसीन के डायरेक्टर प्रोफ़ेसर पीटर पियोट कहते हैं,

अच्छी ख़बर ये है कि कोरोना सार्स विषाणु की तुलना में कम जानलेवा है. अतीत की तुलना में वैश्विक स्तर पर सूचना का ज़्यादा और बेहतर आदान-प्रदान हो रहा है. ये अहम है क्योंकि एक संभावित महामारी से कोई देश अकेले नहीं लड़ सकता है.

इस संक्रमण से निजात पाने के लिए फिलहाल कोई ख़ास इलाज नहीं है. डॉक्टर संक्रमित मरीज़ों का इलाज उनके लक्षण के आधार पर ही कर रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया के डॉक्टरों ने वैक्सीन तैयार करने के लिए कम से कम छः माह तक का समय लग जाने की बात रखी है।

संदर्भ

कोरोना समाचार

PAYTM Fraud

दोस्तों हम जान रहे हैं कि इस समय भारत में आम आदमी के लिए पैसे और नौकरी की कितनी किल्लत है, बैंकों से पैसा नहीं निकालने दिया जा रहा है। नोटबन्दी के गलत और अदूरदर्शी क्रियान्वयन ने हमारी अर्थ व्यवस्था को गम्भीर क्षति पहुँचा दी है।
राजनीति में नहीं जा रही हूँ अभी। लेकिन यह जानना आवश्यक है कि बहुत बड़ी संख्या में लोग #PayTM #KYC #Fraud का शिकार हो रहे हैं। आज सुबह पता लगा हमारी सोसायटी के सदस्य जो अधिकतर यात्रा में रहते हैं और इतना विवरण देख देख transaction नहीं कर पाते उनके 80 हज़ार एक झटके में बैंक खाते से उड़े हैं। जबकी वे जानकार और पढ़े लिखे व्यक्ति हैं फिर भी अवचेतन में यह बात नहीं आती की यह मेरे साथ धोखा होने वाला है।

गौर करें की एक देश जहाँ केवल 10-15% जनता अंग्रेज़ी में दक्ष है वहाँ #Pishing और #SocialEngineering के माध्यम से ऑनलाइन धोखाधड़ी कितनी आसानी से हो सकती है। पढ़े लिखे लोग भी इसकी चपेट में आ रहे हैं।

नीचे दिए गए मैसेज को ध्यान से देखें यह मेरे पति आलोक मिश्र को आया था। अब इसकी वाक्य संरचना में आप पाएंगे की verb का ग़लत प्रयोग है। कोई भी सुप्रसिद्ध संस्था ऐसे गैर जिम्मेदाराना मेसेज नहीं भेजती।

यह अलग बात है कि ये मेसेज वास्तविक गूगल वेरिफाइड PAytm app को प्रयोग करते से ही आता है। यह भी सोचने वाला विषय। क्या यह ओर्गनाइजड क्राइम है?

हम वर्तनी की अशुद्धियों , गलत वाक्य संरचना इत्यादि पर ध्यान नहीं देते। कृपया अब ध्यान दें गलत spelling, सेंटेंस वाले लिंक और मैसेज पर काम आगे न बढ़ाएं ।

ईस दिए गए नम्बर पर कॉल करने से सामने वाला बंदा जो एप डाउनलोड करने बोलता है उससे मोबाइल स्क्रीन शेयरिंग मोड पर जाता है। स्क्रीन शेयरिंग कार्यालयों में प्रयुक्त होने वाली साधारण प्रक्रिया है । हो सकता है साइबर सेल भी इसे वर्जित नहीं करेगा, इसलिये हम सावधान रहें। आलोक को जब कॉलर ने एप डाऊनलोड करने कहा तो उन्होंने पहले समयाभाव और किसी शंका में मना किया था फिर बाद में पता चला की चालू फ्रॉड से बाल बाल बचे हैं वे।

गए वैसे वापिस नहीं आएंगे। मानसिक पीड़ा अलग होगी। कमज़ोर दिल वाले लोग , बीमारी से ग्रस्त लोग तो मरने मरने पे आ जाएंगे।

हमने हाल में देखा है महाराष्ट्र में PMC बैंक से पैसे न निकाल पाने के कारण कुछ लोगों को इलाज नहीं मिला और मौतें भी हुई हैं।

हँस के किसी हालात का मीम बनाना अपराध नहीं है लेकिन हालात वाकई खराब हैं इसे न मानना और एक साथ होकर पब्लिक फोर्स न बनना हम भारतीयों को ले डूबेगा। हम केन्या या ज़िम्बाब्वे के आर्थिक हालात में चले जाएंगे।

#Pishing और #SocialEngineering के बारे में पढ़ें ।
सावधान रहें।

मोबाइल मेसेज प्रूफ

लेडीज़ क्रिकेट – 3

धीरज हिल व्यू टावर सोसायटी की स्पोर्ट्स टीम के सह संचालक श्रीमान चार्ली जी ने पूरा विवरण अंग्रेज़ी भाषा मे दिया है, समय के साथ इनके अनुवाद की कोशिश रहेगी, पंरतु पहले ब्लॉग में इसे सहेज लूँ, कहीं वाट्सप ग्रुप की परतों के गायब होते से यह भी न चला जाये।

चार्ली और उनकी पत्नी जोनू खेल कूद के प्रति बड़ी निष्ठा और लगन से काम कर रहे हैं, हाल ही मैंने देखा है कि स्कूली प्रतियोगिता में अपनी बिटिया को रेस के लिए शारीरिक रूप से तैयार करने के लिए वे स्वयं प्रातः तैयारी करवाते हैं जिससे मांसपेशियों को अधिक परिश्रम की आदत एक निरन्तर प्रक्रिया से बने।

ऐसे माता पिता के बच्चे ही देश को खेल कूद में आगे प्रतिनिधित्त्व देते हैं। जितनी तारीफ की जाए कम है।

नीचे दिए गए लेख में चार्ली जी ने सभी की कड़ी मेहनत को उचित सम्मान के साथ उजागर किया है।

आइये पढ़ते हैं अंग्रेज़ी भाषा मे क्रिकेटोत्सव का विवरण

Dear DHVT’ians,

We had a splendid and a remarkable day yesterday. With deep reverence and love, I would like to thank all the participants and parents for their support. A special thanks for the parents who brought their kids on time and made them participate in the games with the right spirit. I am sure we can expect more kids participating next year. Also ending it here with a promise that next year we will increase the participation counts and make sure no kids are missed out. All the Cricket matches were competitive and played in the right spirit 🙏🏻👍🏼. Obviously have to mention the effort the ladies had put in their practices which obviously paid off as we enjoyed watching them play. I am sure all the ladies have sacrificed their kid’s and family time to ensure they practice well. 👍🏽🙏

All the learnings and outcome of every event has moulded us and bonded us together with love and the unity of DHVT’ians. Together I am sure we can rock the world. We have so much talent in our building which can be nurtured well.

This message won’t be complete if I didn’t thank the below mentioned people who supported and helped the cause throughout :

1) Concept, thought and finalization – Kaushal & Sachin

2) Kids Sports and props arrangement – Prerna, Jonu, Kavita, Minal, Mona

3) Certificates – Minal, Mona, Ishita and Kavita. Special mention to Minal afor sponsoring the certificates for our kids🙏. Mona and Ishita for writing the certificates in their beautiful and legible handwriting.

4) Score Counting – Sunil C, Hemang, Amit B, for their sharp counting and tallying 🙏🏻.

5) Food Management – Ankit, Gajendra, Jonu, Minal, Shreya, Sanjeev, Tariq. Special mention to Mr. Suryakant Walavalkar for his enticing, sparkling juicy Kokam, Orange, Lemon and Jeera drinks which was branded in the name of Nature Day. His discounted rates helped us to serve our building members which was very much appreciated.

6) Umpires – Kaushal, Tejas, Sachin, Naresh, Rupesh, Amit D, Amit B, Bhushan for their dedication, commitment and fair judgement to ensure games are moving smoothly with the right spirit.

7) Special thanks to Acharya Aunty, Shilotri Uncle, Anil Sinha Uncle and Meera Prasad Aunty for encouraging us and being a sport to give away our certificates and Trophies.

8) Also to mention our building cleaning support Ravi and security staff for cleaning the venue and ensure tables and chairs are brought on time.

9) Sponsors – YB Groups (Mattress) and IndiaFirst Insurance. Thanks to Mr. Ashok and Mr. Sumit to help us with the sponsorships 🙏🏻

10) Track and field set up- Kaushal, Sachin, Ankit, Gajendra, Amit B which was a tedious and tiring role considering the time limit we got for the set up.

Last but not the least, all the audiences, parents and our cute lovely kids for coming and making it a grand success. Our specially designed T-shirts added charm, vibrancy and colour to the whole event. 😊. Happy to see that every DHVT’ian contributed in some way or the other to ensure the event to be a grand success.

Once again special thanks to Kaushal and Sachin for their constant, positive support till the end. Thank you all and see you soon with another sports event.

Regards
Charlie
DHVT Sports Team😊

प्रतिभागी बच्चे
पांडव कैप्टन
सभी वालंटियर और प्रतिभागी बच्चे
द लिस्ट
विनिंग टीम अपने कोच सचिन के साथ

सीपी से मोती जैसी यादें मीठी मीठी

रतन टाटा के जैसे हमको भी #throwbackthursday करना था लेकिन देर हो गयी, अंशू की ऊषा आँटी नहीं है तो मतलब चूल्हा चौका बचुआ के लिए जो हैं सो हम ही हैं, आगे तो वही राम कहानी, हटाओ न किसी को सुननी न हमको सुनानी। भांजी सोचेगी मामी मेरा क्रेडिट ले ली, तो उसको भी लेख यात्रा में टान लेते हैं।

यह तस्वीर श्रुति चित्रांशी ने ली थी। हम लोग साल 2009 में हैं, सीप्ज़, अँधेरी पूर्व, मुंबई -96 , महाराष्ट्र और इंडिया रहने देते हैं, बहुत हुआ , वैसे भी तस्वीर है , टाइम-मशीन थोड़ी की आदमी देखने पहुँच जाए की प्राची के टीटू भैया तब भी “और मोटी , कैसी हो” कहते आज भी ” और मोटी कैसी हो कहते हैं” … तो आखिर ऐसा क्यों?

ख़ैर, आज कल सब इधर-उधर निकल जाते हैं तो हम भी सही।

2009 में सारी भूतिया अफवाहों से बाहर निकल कर सीप्ज़ सेज़ का तालाब और नया बना बगीचा घूमने फिरने के लिए तैयार हो गया था। बाद में पैरानॉर्मल सोसायटी के रोहित शर्मा ने भी बताया मुझे की वहां कोई फ्रिकवेंसी नहीं मिली थी। मतलब पादरी के एग्झोररसिज़्म के बाद तालाब की सारी मछलियाँ बाहर निकल के मरने वाली बात अब, टाइम ऑफ इंडिया में छपी कोरी कहानी भर थी। शुक्र है, उसे सत्यापित न किया जा सका। वर्ना कुशहर-सीतामढ़ी में जितनी झूठी कहानियां सुना कर घर के लाडले बच्चों को निहाल किया था वो सब सच निकल जातीं।

इन सारी बातों के बाद टूटी चर्च के ठीक पीछे का हनुमान मंदिर आज भी यही सिद्ध करता है कि जो है सो बजरंग बाण ही है।

गेट नम्बर 2 से परली साइड वाली आई. सी. एच. की कैंटीन जाने वाला रास्ता गीतांजलि ज्वेलर के बैनर के बाद तपाक से पार करते थे।इसी बीच होता था चर्च का खंडहर। सब डरते थे।

हमारे ऑनसाइट रिटर्न ग्रैंडमास्टर मॉड्यूल लीड सुमित जो आयोनेला को बेहद प्रिय थे, अपनी गंभीर मुस्कराहट से मिश्रित व्यंग बाण से कहते ,क्या बच्चों जैसे तुम लोग डरते हो।
राकेश , श्रुति , मैं तो भई डरते थे। अभिज्ञा समय से पहले ही बुद्धि से अति पक बुढ़ा गए थे उनका कुछ समझ नहीं आता था। केवल एक गाने के सिवा , ‘ये मेरा दीवानापन है, या मोहोब्बत का सुरूर, तू न पहचाने तो है ये, तेरी नज़रों का कुसूर” ।

आ हा हा, कतई इकलौती सी रिंगटोन जो न फिर सुनी न फिर किसी ने लगाई लेकिन उसी साल सन्नी लियोनी इसी गाने के साथ बिग बॉस के मार्फ़त हमारे देश मे गंगानहों गयीं की मार्किट में चितपावन होकर आच्छादित भी हो गयीं ।

इसके साथ ही ली गई तस्वीर में सुमित, मैं श्रुति , अभिज्ञा हैं , राकेश ने क्लिक की होगी ।

हम वो ग्रुप तस्वीर नहीं लगा रहे जिसमें सब थे , वो देखने के लिए सबको फेसबुक फोटोज़ में खोजने का काम देना ठीक है, इस वक़्त खाली खुद पे फोकस है, क्योंकि बिलेटेड #throwbackthursday टू मी।

यह पचीस वर्षीय प्रज्ञा है।