नेटफ्लिक्सड

#नेटफ्लिक्सड

गत शुक्रवार एक वेबिनार एटेंड किया। जिसमें बताया गया कि बदलते समय के साथ किस तरह अपने रोज़गार, व्यापार या उद्योग को सापेक्षिक बनाये रखने के लिए हमें प्रलयकारी नवीनीकरण की दिशा में सोचना होगा। तकनीकी भाषा में समझें तो यह हैं “डिसरप्टिव टेक्नोलॉजीज़” का प्रयोग।

डिसरप्टिव तकनीकें ऐसे अविष्कार हैं जो उपभोक्ताओं, उद्योगों या व्यवसायों को संचालित करने के तरीके को महत्वपूर्ण रूप से बदल देता है। वे कार्य प्रणाली या आदतों को बदल देते हैं क्योंकि इसमें तुलनात्मक रूप से बेहतर सुझाव पाए जाते हैं। एक तरह से जड़ता को बार बार चुनौती देते रहना।

विघटनकारी प्रौद्योगिकी के उदाहरणों में ई-कॉमर्स, ऑनलाइन समाचार साइटें, सवारी-साझाकरण ऐप और जीपीएस सिस्टम शामिल हैं।

अपने समय में, ऑटोमोबाइल, बिजली सेवा और टेलीविजन भी विघटनकारी तकनीक थे जिन्होंने उस समय के मौजूदा आय के स्रोतों को हाशिये पर पहुंचा दिया था ।

चाणक्य नीति में इसे समझें तो सामने वाले की लकीर के आगे बड़ी लकीर खींच देना जिससे वह अपने आप लघु रह जाये, हम उत्तरोत्तर बढ़ते जाएं ।

यह चर्चा शुरू होती है #नेटफ्लिक्स ऑनलाइन मूवी रेंटल के प्रादुर्भाव से जिसकी पूरी कथा गिना कीट्स अपनी किताब नेटफ्लिक्सड में देती हैं। इसके बाद सारी दुनिया ने नेटफ्लिक्स को बतौर संज्ञा शब्द लेना छोड़ दिया और “#नेटफ्लिक्सड” बाज़ार में आज एक क्रिया शब्द की तरह प्रयोग किया जाता है।

#नेटफ्लिक्सड बताता है यदि आप या आपका मौजूदा उद्योग कम्पिटेंसी , नए आइडिया, प्लानिंग और रिस्क मैनेजमेंट में अग्रगामी नहीं हैं तो तेज़ी से बदलते दौर में आपका नेट वर्थ अपने आप शून्य हो जाएगा।

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यूँ तो यह हृदय हीन सुनाई देता है, परन्तु बाज़ार, भावनाओं से नहीं, बदलते समय के साथ उपभोक्ता को दी जा सकने वाली सहूलत से चलता है।

नेटफ्लिक्सड कहानी में हम देखते हैं कि एक समय था जब #ब्लॉकबस्टर अपने क्षेत्र की सबसे बड़ी डोर टू डोर डीवीडी रेंटल कंपनी थी (ब्लॉकबस्टर एक पे-पर-व्यू वीडियो-ऑन-डिमांड सेवा है जिसमे आप प्रत्येक विडीओ को व्यक्तिगत रूप से किराए पर लेते हैं या खरीदते हैं)।
जबकि #नेटफ्लिक्स एक “ऑल यू केन ईट” योजना है जो एक फ्लैट मासिक दर के लिए हजारों फिल्में और टीवी शो प्रदान करती है,उस ज़माने में जब सबके पास हाथ हाथ इंटरनेट नहीं था नेटफ्लिक्स ऑनलाइन रेंटल के आइडिया के साथ आया जिसे ब्लॉकबस्टर ने न सिर्फ हल्के में लिया बल्कि काउंटर स्ट्रेटजी भी प्लान नहीं की।

जब नेटफ्लिक्स 1997 में लॉन्च हुआ, तो ब्लॉकबस्टर वीडियो रेंटल इंडस्ट्री का निर्विवाद चैंपियन था।

1985 और 1992 के बीच, ब्रिक एंड मोर्टर रेंटल की श्रृंखला अपने पहले स्थान से (डलास, टेक्सास में) दुनिया भर में 2,800 से अधिक स्थानों पर बढ़ी।

आगे हम सब जानते हैं कि 2001 के बाद किस तरह तेज़ी से इंटरनेट ने जाल फैलाया और डीवीडी रेंटल एक इतिहास बन कर रह गया।

इंटरनेट पर उप्लब्ध एक केस स्टडी यह उध्दृत करती है :

जैसा कि जीवन में ज्यादातर चीजों के साथ होता है, यह एक बारीक स्थिति थी। ब्लॉकबस्टर के खराब फैसलों, इंटरनेट का तकनीकी विकास और अन्य योगदान कारकों का एक आदर्श तूफान था, जो नेटफ्लिक्स की चौंका देने वाली वृद्धि का कारण बना और ब्लॉकबस्टर की समान रूप से आश्चर्यजनक गिरावट होती गयी (जब 2010 में ब्लॉकबस्टर दिवालिया घोषित की गई, नेटफ्लिक्स की वार्षिक शुद्ध आय $ 161 मिलियन थी।)

आज, नेटफ्लिक्स का मूल्य लगभग $ 203 बिलियन है – 2000 में इसके मूल्यांकन से 4,060% की वृद्धि।

ब्लॉकबस्टर का अंत और नेटफ्लिक्स का उत्थान बाज़ार को बाधित करने वाली प्रौद्योगिकी का बेहतरीन उदाहरण है , आप इसके बारे में इंटरनेट पर और अध्ययन कर सकते हैं मेरे लेख का उद्देश्य तेज़ी से बदलते टेक्नोलॉजी लैंड्सकैप, महामारी जनित बदलाव के कारण खुद को बचाने के इंतज़ाम में आइडिएशन और थिंक टैंक बनने की ज़रूरत पर बल देना है। अभी कुछ हफ्तों पहले मैंने लेक चोलुटेका पर एक अनुवाद साझा किया था जिसमें हमने समझा

“हमारी चुनौती यह है कि हम किसी समस्या के लिए सबसे अच्छा समाधान बनाने पर ध्यान केंद्रित करते हैं। जबकि हम भूल जाते हैं कि समस्या ही स्वयं बदल सकती है। हम सभी परिष्कृत उत्पाद या सेवा के निर्माण पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।इस संभावना के बारे में सोचे बिना कि उस चीज़ की जरूरत ही गायब हो सकती है।”

सफल व्यापार वे होते हैं जो रिएक्टिव नहीं प्रोएक्टिव होते हैं इसलिए इससे पहले की ज़रूरत खत्म हो और आउट ऑफ बिज़नस बेरोजगार होकर रह जाएं ज़रूरत है सोचने की नए बेहतर सुझाव , स्किल डेवलपमेन्ट।

“सब कुछ तो अच्छा जा रहा , ओहो अब इन बदलावों की क्या ज़रूरत,” ऐसा कहते हुए अक्सर आपस में हम गरेप्वाईन चर्चा कर नकारात्मक तरीके से बदलाव को कोसना शुरू कर देते हैं। जबकि हकीकत यही है कि जहां इत्मिनान पकड़ा, ढील दी की हमारी #cheese, हमारी पोज़िशन, हमारी नौकरी कोई दूसरा बेहतर और मेहनती हाथों हाथ ले जाएगा। हम निरन्तर खुद को कष्ट में नहीं डालते रहेंगे तो गैरज़रूरी आराम का सामान होकर रह जाएंगे जिसके न होने से कोई फर्क नहीं पड़ता।

पिछ्ली सफलता, जीवम की सीढ़ी पर एक स्टेप ऊपर की ओर है , उसी स्टेप पर खड़े भी नहीं रह सकते न उस स्टेप को निहार कर वहाँ घर बना सकते हैं। हमें पीछे आने वाले लोगों के लिए आगे बढ़ते रहना होगा वर्ना धक्का मुक्की होगी और क्या पता उम्र की मार, मनोवैज्ञानिक मार कौन सी बात से हम पिछड़ कर पहले गिर जायें।

एक किताब “हू मूव्ड माई चीज़” ज़रूर पढ़ी जानी चाहिये निरन्तर प्रयासरत रहने की ज़रूरत को समझते रहने के लिए ताकि हम अपने विभाग में अनावश्यक न करार दिए जाएं।

मेरे पापा और दादी माँ द्वारा बोले जाने वाला एक उद्धरण मैं खुद को याद दिलाती रहती हूँ । जब जब मैंने बोला ” यह मेरे भाग्य में नहीं” कोई मेरे अंदर से बोला:

कादर मन को एक सहारा दैव दैव आलसी पुकारा।

फिर मैं उठती हूँ अचानक डायरी या अब मोबाइल नोट्स पर लिखती हूँ:

का बरखा जन कृषि सुखाने
समय बिति पुनि का पछिताने

आप और भी क़ई तरह से इसे समझ सकते हैं

डारविन का सरवाइवल ऑफ द फिटेस्ट

या गीता से उद्धरित निराला के मुक्क्त छंद

योग्य जन जीता है
पश्चिम की उक्ति नहीं
गीता है गीता है

प्राइवेट कम्पनी में रोज़गार हो या अपना व्यापार हो , भावी संकट के घटित हो जाने के बाद उसका मुद्दा खड़ा करने की प्रतीक्षा नहीं करनी है। पहले लिख लेना है समस्याओं को, फिर जो समाधान हो सकें उनको तैयार रखना है नहीं तो हम भी नेटफ्लिक्सड हो सकते हैं अपने कार्य क्षेत्र में या नहीं तो हमारा व्यापार ही बंद पड़ सकता है।