सीपी से मोती जैसी यादें मीठी मीठी

रतन टाटा के जैसे हमको भी #throwbackthursday करना था लेकिन देर हो गयी, अंशू की ऊषा आँटी नहीं है तो मतलब चूल्हा चौका बचुआ के लिए जो हैं सो हम ही हैं, आगे तो वही राम कहानी, हटाओ न किसी को सुननी न हमको सुनानी। भांजी सोचेगी मामी मेरा क्रेडिट ले ली, तो उसको भी लेख यात्रा में टान लेते हैं।

यह तस्वीर श्रुति चित्रांशी ने ली थी। हम लोग साल 2009 में हैं, सीप्ज़, अँधेरी पूर्व, मुंबई -96 , महाराष्ट्र और इंडिया रहने देते हैं, बहुत हुआ , वैसे भी तस्वीर है , टाइम-मशीन थोड़ी की आदमी देखने पहुँच जाए की प्राची के टीटू भैया तब भी “और मोटी , कैसी हो” कहते आज भी ” और मोटी कैसी हो कहते हैं” … तो आखिर ऐसा क्यों?

ख़ैर, आज कल सब इधर-उधर निकल जाते हैं तो हम भी सही।

2009 में सारी भूतिया अफवाहों से बाहर निकल कर सीप्ज़ सेज़ का तालाब और नया बना बगीचा घूमने फिरने के लिए तैयार हो गया था। बाद में पैरानॉर्मल सोसायटी के रोहित शर्मा ने भी बताया मुझे की वहां कोई फ्रिकवेंसी नहीं मिली थी। मतलब पादरी के एग्झोररसिज़्म के बाद तालाब की सारी मछलियाँ बाहर निकल के मरने वाली बात अब, टाइम ऑफ इंडिया में छपी कोरी कहानी भर थी। शुक्र है, उसे सत्यापित न किया जा सका। वर्ना कुशहर-सीतामढ़ी में जितनी झूठी कहानियां सुना कर घर के लाडले बच्चों को निहाल किया था वो सब सच निकल जातीं।

इन सारी बातों के बाद टूटी चर्च के ठीक पीछे का हनुमान मंदिर आज भी यही सिद्ध करता है कि जो है सो बजरंग बाण ही है।

गेट नम्बर 2 से परली साइड वाली आई. सी. एच. की कैंटीन जाने वाला रास्ता गीतांजलि ज्वेलर के बैनर के बाद तपाक से पार करते थे।इसी बीच होता था चर्च का खंडहर। सब डरते थे।

हमारे ऑनसाइट रिटर्न ग्रैंडमास्टर मॉड्यूल लीड सुमित जो आयोनेला को बेहद प्रिय थे, अपनी गंभीर मुस्कराहट से मिश्रित व्यंग बाण से कहते ,क्या बच्चों जैसे तुम लोग डरते हो।
राकेश , श्रुति , मैं तो भई डरते थे। अभिज्ञा समय से पहले ही बुद्धि से अति पक बुढ़ा गए थे उनका कुछ समझ नहीं आता था। केवल एक गाने के सिवा , ‘ये मेरा दीवानापन है, या मोहोब्बत का सुरूर, तू न पहचाने तो है ये, तेरी नज़रों का कुसूर” ।

आ हा हा, कतई इकलौती सी रिंगटोन जो न फिर सुनी न फिर किसी ने लगाई लेकिन उसी साल सन्नी लियोनी इसी गाने के साथ बिग बॉस के मार्फ़त हमारे देश मे गंगानहों गयीं की मार्किट में चितपावन होकर आच्छादित भी हो गयीं ।

इसके साथ ही ली गई तस्वीर में सुमित, मैं श्रुति , अभिज्ञा हैं , राकेश ने क्लिक की होगी ।

हम वो ग्रुप तस्वीर नहीं लगा रहे जिसमें सब थे , वो देखने के लिए सबको फेसबुक फोटोज़ में खोजने का काम देना ठीक है, इस वक़्त खाली खुद पे फोकस है, क्योंकि बिलेटेड #throwbackthursday टू मी।

यह पचीस वर्षीय प्रज्ञा है।

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