लोकेश श्रीवास्तव जी की कविता “नदी”

लोकेश श्रीवास्तव जी कल ही टेलीग्राम स्थित चैनल से जुड़े हैं और उनकी यह पहली पोस्ट आयी है। कविता में नदी के क़ई उपमान दिए गए हैं कि नदी किसके लिए क्या मायने रखती है।

आज कल मैं रचनात्कम लेखन पर पढ़ाई कर रही हूँ । ये प्रयास पढ़ें तो हमारी समझ में आएगा की किसी आस पास घटित होती बात को तारतम्यता में देखते हुए रचना कैसे गढ़ी जानी चाहिए।

एक शब्द उठाया है कवि ने यहाँ नदी , और नदी को विभिन्न रूप आए देखे जाने पर अपनी सोच रखी है और एक चित्र सा बनता गया पाठक के दिमाग में।

एक ही बात कितने लोगों के लिए कितने अलग अलग मायने रख सकती है।

ठीक इसी तरह से पैटर्न पर पहाड़ , डायरी, किताब, पुष्प, आदि शब्दों पर काव्य रचना हो सकती है।

अब कुछ लोग कह सकते हैं कि भई सोच सोच कर लिखी गयी कविता थोड़ी न भावनात्मक होती है, तो उस पर मेरा जवाब यही है कि करत करत अभ्यास नित जड़मति होत सुजान मतलब अच्छा लिखने के लिए लिखते रहना आवश्यक है, भावनाओं के भरोसे मत बैठिए, क्या देखा है जीवन में, कैसे समझ बढ़ाई है जीवनानुभव से इसको आधार बनाकर शब्दों से खेलना शुरू कीजिए, भावनाएं स्वयं फूटेंगी ।

फेसबुक पर कवि लोकेश जी की अन्य कविताएँ पढ़ने के लिये यहाँ क्लिक करें

टेलीग्राम पर मेरे चैनल से जुड़ने और रचनात्मक लेखन पर बात करने के लिए नीचे दी गई लिंक से जुड़ें।

Channel created to Promote Creative Writing in Hindi by Shatadal dot com in association with Benchhmark.
https://t.me/shtadal

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.